एक महीने का सीजफायर, No Nuclear, होर्मुज… ईरान जंग खत्म करने के लिए ट्रंप की 15 शर्तें – donald trump 15 point peace proposal iran war ceasefire No Nuclear Strait of Hormuz ntc ntyv

ByCrank10

March 25, 2026


ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के सामने 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा है, जिसमें वाशिंगटन ने एक महीने के सीजफायर, तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को सीमित करना, प्रॉक्सी ग्रुप्स (हमास, हिजबुल्लाह आदि) को समर्थन बंद करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की मांग रखी है. वहीं, इसके बदले में अमेरिका ने ईरान पर आंशिक प्रतिबंध हटाने और UN की निगरानी में नागरिक परमाणु कार्यक्रम की मंजूरी देने का प्रस्ताव दिया है.

बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव में ईरान की सैन्य बुनियादी ढांचे और मिसाइल क्षमताओं को खत्म करने की बात कही गई है. इसके साथ ही ईरान को अपने प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करना होगा. अमेरिका चाहता है कि परमाणु ईंधन की सुविधा ईरान से बाहर स्थित हो. हालांकि, राजनयिकों का मानना ​​है कि ये शर्तें इतनी व्यापक हैं कि ईरान इन्हें वर्तमान स्वरूप में स्वीकार करने के लिए शायद ही तैयार हो.

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ये प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया है. ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पोस्ट साझा की, जिसमें इस्लामाबाद ने सार्थक बातचीत की सुविधा देने की बात कही है. अगले हफ्ते से शुरू होने वाली इस संभावित वार्ता में अमेरिका की ओर से स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर शामिल हो सकते हैं.

USA के कदम से इजरायल हैरान

उधर, अमेरिका के इस अचानक सीजफायर प्रस्ताव ने इजरायली अधिकारियों को हैरान कर दिया है जो युद्ध जारी रखने के पक्ष में थे. दूसरी ओर, कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद पेंटागन क्षेत्र में 3,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है. वर्तमान में मिडिल ईस्ट में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि सैन्य गतिविधियां बढ़ीं, तो वह खाड़ी में समुद्री बारूद (नेवल माइंस) बिछा सकता है.

नया नहीं है पीस प्लान

विशेषज्ञों का कहना है कि ये 15-सूत्रीय ढांचा पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि मई 2025 के उस प्रस्ताव पर आधारित है जो इजरायली हमलों के बाद विफल हो गया था.

पहले की योजना में कथित तौर पर व्यापक शर्तें लगाई गई थीं, जिनमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर सख्त सीमाएं लगाना, यूरेनियम भंडार को बाहर भेजना, संवर्धन सुविधाओं को निष्क्रिय करना और प्रतिबंध राहत निधि के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करना शामिल था, जबकि केवल आंशिक प्रतिबंधों में ढील और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक नागरिक परमाणु कार्यक्रम की पेशकश की गई थी.

इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या संशोधित संस्करण औपचारिक रूप से ईरान को प्रस्तुत किया गया है. कुछ राजनयिकों को शक है कि कोई ठोस नया प्रस्ताव मौजूद भी है या नहीं और यदि है भी, तो संभवतः इसे अभी तक तेहरान के साथ साझा नहीं किया गया है.

वहीं, ट्रंप ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में हुई बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत से ईरान के साथ प्रगति हुई है. हालांकि, तेहरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत को फिर से शुरू करने के बारे में सीमित अप्रत्यक्ष संपर्कों के अलावा कोई गुप्त वार्ता नहीं हुई है.

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता (ऑफ-रैंप) तलाश रहे हैं. हालांकि, दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास और ईरान के अंदर वार्ता के अधिकार को लेकर अनिश्चितता इस शांति प्रक्रिया में बड़ी बाधा है.

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