केरलम है कांग्रेस की प्राथमिकता में नंबर वन, राहुल गांधी के लिए चुनौती बाहरी से ज्यादा ‘भीतरघात‘ की – keralam election congress candidates rahul gandhi udf challenges ntcpmr


केरलम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की तत्परता में गंभीरता की भी झलक मिलती है. विधानसभा के लिए चुनाव तो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में भी हो रहे हैं, लेकिन कांग्रेस का ज्यादा जोर केरलम में ही नजर आ रहा है.

राहुल गांधी खुद केरलम चुनाव कैंपेन की शुरुआत करने जा रहे हैं. केरलम के कोझिकोड बीच ग्राउंड पर राहुल गांधी कांग्रेस की रैली भी करेंगे. राहुल गांधी पिछली बार भी सबसे ज्यादा केरलम में भी एक्टिव देखे गए थे. केरलम के लोगों से कनेक्ट होने के चक्कर में राहुल गांधी ने उत्तर भारतीयों की राजनीतिक समझ पर ऐसी टिप्पणी कर डाली थी कि बवाल मच गया था.

हाल ही में राहुल गांधी ने सोशल साइट X पर लिखा था, यूडीएफ की टीम ही केरलम की टीम है… केरलम जीतेगा, यूडीएफ नेतृत्व करेगा. केरलम के साथ अपना लगाव जताते हुए राहुल गांधी ने लिखा, मेरे लिए केरलम मेरा घर है, और यहां के लोग मेरा परिवार हैं… लोगों ने मुझे जो सिखाया है, और जो प्यार और अपनापन दिया है, उसके लिए मैं उनका ऋणी हूं… मैं हमेशा आपके साथ खड़ा रहूंगा.

और फिर दावा करते हैं, केरलम से जो संदेश मिल रहा है, वह बिल्कुल साफ है… लोग बदलाव चाहते हैं. वे ऐसी सरकार चाहते हैं जो उनकी बात सुने, उन्हें समझे और ईमानदारी से काम करे.

2019 में राहुल गांधी केरलम के वायनाड से ही संसद पहुंचे थे. चुनाव तो 2024 में भी जीते थे, लेकिन रायबरेली के लिए छोड़ दिए. अब उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में उनको असम भेज दिया गया है – और केरलम की कमान राहुल गांधी स्वयं संभाल रहे हैं. साथ में, उनके सबसे भरोसेमंद कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल तो मोर्चे पर डटे हुए हैं ही.

केरलम कांग्रेस की गुटबाजी, और नेताओं की नाराजगी

केरलम में विपक्षी गठबंधन यूडीएफ की अगुवाई कर रही कांग्रेस 92 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बाकी सहयोगी दलों के लिए हिस्से में गई हैं. केरलम में विधानसभा की 140 सीटें हैं.  2021 के चुनाव में कांग्रेस 93 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस के 21 विधायक चुनकर आए थे.

राहुल गांधी के टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी जाहिर करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल ही में विशेष बैठक बुलाई थी. बैठक रात 10:30 बजे शुरू होकर आधी रात के बाद 2:30 बजे तक चली. देर रात तक चलने वाली कांग्रेस की यह हाई लेवल बैठक अक्सर होती, ऐसा नहीं देखा गया है. बीजेपी में तो ऐसी बैठकें हमेशा ही होती रहती हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी होते हैं.

लेकिन, मैराथन बैठक के बाद भी कांग्रेस नेताओं की नाराजगी ही सामने आई. कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने उम्मीदवारों की लिस्ट में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर सवाल भी उठाए. शमा मोहम्मद का कहना था कि 92 में से सिर्फ 9 महिलाओं को ही टिकट दिया गया. वैसे 2021 में भी करीब-करीब ऐसा ही देखने को मिला था. तब 93 उम्मीदवारों में 10 महिलाओं को टिकट मिला था.

कांग्रेस नेता के. सुधाकरन ने कन्नूर से चुनाव लड़ने की मांग की थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला. बताते हैं कि शमा मोहम्मद भी कन्नूर से टिकट की चाहती थीं. X पर राहुल गांधी को टैग करते हुए शमा मोहम्मद ने लिखा, इनकार हुआ है, लेकिन हौसला नहीं टूटा है… मैं अपने नेता राहुल गांधी जी से, जिनका मैं आदर और सम्मान करती हूं, विनम्र अपील करती हूं कि वे केरलम में कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं की मदद करें. 92 में से सिर्फ 9 टिकट ही महिलाओं को दिए गए… 2024 के लोकसभा चुनाव में 16 टिकटों में से केवल 1 महिला को मौका मिला… अगर कोई महिला प्रतिभाशाली भी हो, तो उसकी स्थिति और भी मुश्किल हो जाती है. यह बेहद दुखद है.

कांग्रेस नेता के. सुधाकरन ने तो टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी तक दे डाली है. कांग्रेस ने कन्नूर से टी ओ मोहनन को टिकट दिया है.

असल में, रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने केरलम यूनिट की तरफ से बांटे गए टिकटों पर असंतोष जताया था. राहुल गांधी का कहना था कि सिर्फ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से नॉमिनेट किए गए नेताओं को ही टिकट न दे दिए जाएं, बल्कि उम्मीदवारों की सूची में जातीय समीकरण, चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड, सर्वे रेटिंग और जिला कांग्रेस कमिटियों के फीडबैक को भी शुमार किया जाए.

मैराथन बैठक में क्या फैसला हुआ था

केरलम विधानसभा चुनाव की तैयारी सभी कांग्रेस नेता अपने अपने स्तर पर कर रहे थे. के सी वेणुगोपाल तो अपने इलाके में भी काफी समय दे रहे थे, जिससे उनके भी विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही थी – लेकिन, राहुल गांधी के सख्त होते ही सब कुछ बदल गया.

1. मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में तय हुआ कि कोई लोकसभा सांसद विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा. पूर्व केरलम कांग्रेस अध्यक्ष के. सुधाकरन के अलावा अडूर प्रकाश, शफी परंबिल सहित कम से कम 5 सांसद विधानसभा चुनाव के लिए टिकट चाहते थे.

राहुल गांधी का कहना था, अगर सांसद विधानसभा का चुनाव लड़ते हैं, तो लोकसभा उपचुनाव होंगे. केरलम के वोटर को मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भ्रम पैदा होगा, और पार्टी की स्थिति कमजोर होगी.

2. सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, मीटिंग में तय हुआ कि अगर कांग्रेस बहुमत हासिल करती है, तो विधायक किसी सांसद का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए आगे कर सकते हैं, और उनकी राय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.

3. केरलम में कांग्रेस के टिकट बंटवारे को लेकर इंडिया टुडे/आजतक को एक सूत्र ने बताया है कि लगभग 60 फीसदी उम्मीदवार के सी वेणुगोपाल के करीबी माने जाते हैं.

4. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव लड़ने वाले 55 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में से लगभग 17 उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल के गुट से हैं, रमेश चेन्निथला के गुट से 9 और विधानसभा में विपक्ष के नेता डी सतीशान के गुट से 5 थे. कुछ सांसदों के करीबियों को भी 1 या 2 सीटें मिली हैं.

5. सबसे खास बात, सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर ने अपने किसी भी उम्मीदवार के लिए टिकट नहीं मांगा, और न टिकट बंटवारे उनका कोई खास दखल ही सामने आया है.

मौका तो है, लेकिन मुश्किलें भी कम नहीं

2021 के विधानसभा चुनाव में शुरू में कांग्रेस की तरह बीजेपी खेमे में भी भारी उत्साह देखा गया था. बीजेपी की तरफ से मेट्रोमैन ई. श्रीधरन भी खासे एक्टिव नजर आए थे, लेकिन दिल्ली से आलाकमान के दिलचस्पी नहीं दिखाने के बाद वे भी शांत हो गए थे. केरलम की परंपरा को देखते हुए कांग्रेस को सत्ता में वापसी की बहुत उम्मीद थी, लेकिन मुख्यमंत्री पी. विजयन ने LDF के खाते में 99 सीटें लाकर सत्ता में वापसी का नया चलन शुरू कर दिया.

केरलम विधानसभा में बीजेपी अभी तक खाता भी नहीं खोल पाई है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट पर सुरेश गोपी की जीत ने कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा दिया है. त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र में 60 फीसदी हिंदू हैं, 10-15 फीसदी मुस्लिम और 25-30 फीसदी ईसाई वोटर मौजूद हैं – उसके बाद तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 101 वार्डों में से 50 में एनडीए की जीत से बीजेपी का हौसला काफी बढ़ा है.

कांग्रेस सांसद शशि थरूर के इलाके में बीजेपी की जीत के बाद केरलम दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, भाजपा की जीत राजनीतिक परिदृश्य में मील का पत्थर है. बोले, इस जीत ने केरलम में भाजपा की जीत की नींव रख दी है. प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य रैली में कहा था, केरलम में अब एक तीसरा विकल्प मौजूद है, जो विकास और सुशासन को प्राथमिकता देता है.

मुद्दे की बात यह है कि केरलम में बीजेपी का उभार किसके लिए फायदेमंद है – सत्ताधारी एलडीएफ के लिए या कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के लिए?

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