एअर इंडिया की न्यूयॉर्क-दिल्ली फ्लाइट के दौरान एक बुजुर्ग महिला सहयात्री पर नशे की हालत में पेशाब करने के आरोपी शंकर श्यामनवल मिश्रा को बड़ी राहत मिली है. अपीलीय समिति ने उनके खिलाफ लगाया गया नो-फ्लाई बैन हटा दिया है और मामले की जांच में अपनाई गई प्रक्रिया को गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है. यह बैन सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (CAR) के तहत उन्हें ‘अव्यवस्थित यात्री’  (Unruly Passenger) घोषित किए जाने के बाद चार महीने के लिए लगाया गया था. लेकिन अपीलीय समिति ने पाया कि आंतरिक जांच समिति (IIC) द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में मूलभूत खामियां थीं.

समिति ने अपने आदेश में कहा कि जांच के दौरान न तो पीड़ित यात्री और न ही कोई अन्य गवाह समिति के सामने पेश हुआ. एअर इंडिया की ओर से समिति के सामने पेश हुए क्रू मेंबर्स- रेबेका वाइफेल, नीता कटारिया और रूबी सिंगसिट के बयान भी बिना हलफनामे के रिकॉर्ड किए गए थे और उन्हें जिरह के लिए पेश नहीं किया गया. इसके बावजूद IIC ने इन्हीं बयानों के आधार पर शंकर श्यामनवल मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की. अपीलीय समिति, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति विजेंद्र जैन कर रहे थे, ने स्पष्ट किया कि बिना हलफनामे पर दिए गए और जिरह से परखे बिना स्वीकार किए गए बयान कानूनी रूप से मान्य साक्ष्य नहीं माने जा सकते.

समिति ने यह भी कहा कि अपीलकर्ता को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जो न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. हालांकि समिति ने यह भी माना कि विभागीय जांच में साक्ष्य के सख्त नियम लागू नहीं होते, लेकिन निष्कर्ष ऐसे साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए जो तार्किक और विश्वसनीय हों. इस मामले में ऐसा नहीं पाया गया. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपीलीय समिति ने IIC की रिपोर्ट को रद्द कर दिया और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए उसी समिति के पास वापस भेज दिया है.

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साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि एअर इंडिया गवाहों के हलफनामे दाखिल करे, दोनों पक्षों को अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने का अवसर मिले और अपीलकर्ता को गवाहों से जिरह करने का पूरा अधिकार दिया जाए. यह घटना 26 नवंबर 2022 को एअर इंडिया की न्यूयॉर्क से दिल्ली की फ्लाइट में सामने आई थी, जब एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने शंकर मिश्रा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने नशे की हालत में उसके ऊपर पेशाब कर दिया. इस संगीन आरोप के चलते शंकर को फाइनेंस सेक्टर की अमेरिकी कंपनी ‘वेल्स फार्गो’ ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था.

आरोपी शंकर मिश्रा के वकील ने दिल्ली की अदालत में कहा था, ‘मेरे मुवक्किल ने शिकायतकर्ता पर पेशाब नहीं किया. महिला की सीट इस तरह से ब्लॉक थी कि वहां तक पहुंचना संभव नहीं था. शिकायतकर्ता को इनकॉन्टिनेंस (पेशाब संबंधी स्वास्थ्य समस्या) की समस्या है और उन्होंने खुद पर ही पेशाब कर दिया. वह एक कथक डांसर हैं और 80% कथक नर्तकों को इस तरह की समस्या होती है. उनकी सीट तक केवल पीछे की ओर से पहुंचा जा सकता था, और किसी भी स्थिति में पेशाब सीट के सामने वाले हिस्से तक नहीं पहुंच सकता था. साथ ही, उनके पीछे बैठे यात्री ने ऐसी किसी घटना की शिकायत नहीं की.’

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