इराक की तरह ईरान के भी खजाने की चाबी चाह रहा अमेरिका? देखें कूटनीति

ट्रंप के ताज़ा बयान की पूरी दुनिया में चर्चा है. उनका दावा है कि ईरान उन्हें अपना ‘सुप्रीम लीडर’ बनाना चाहता था और उन्होंने बहुत विनम्रता से मना कर दिया. सुनने में यह बहुत बड़ा त्याग लगता है. लेकिन इससे पहले कि हम तालियाँ बजाएं, चलिए 20 साल पीछे चलते हैं। क्योंकि अमेरिका की एक पुरानी आदत है—वो किसी देश को तोड़ता है और फिर उसे ‘पार्टनरशिप’ का नाम दे देता है. सवाल यह है कि क्या ट्रंप वही पुरानी फिल्म ‘बुश 2.0’ के नाम से दोबारा रिलीज़ कर रहे हैं? देखें कूटनीति.





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