अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की नीतियों के खिलाफ ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शन शुरू हुए. भारी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और वाशिंगटन स्मारक की ओर मार्च किया.
प्रोटेस्ट के दौरान ‘नो जस्टिस, नो पीस’ और ‘एकजुट जनता को कभी बांटा नहीं किया जा सकता’ जैसे नारे गूंजते रहे. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार एक विशिष्ट वर्ग के हितों के लिए काम कर रही है और आम नागरिकों को अनदेखा किया जा रहा है.
प्रदर्शनकारियों ने खासतौर पर ‘सेव एक्ट’ और विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर गुस्सा जाहिर किया. उनके मुताबिक इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ रहा है और देश का लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर हो रहा है.
प्रदर्शन में शामिल राचेल नामक एक महिला ने अमेरिकी सपने के खोने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, ‘समृद्धि के वादे के साथ, मुझे लगता है कि आप अमेरिकी सपने की बात कर रहे हैं. मुझे लगता है कि हम इस समय उस सपने से भटक रहे हैं. कुछ लोगों को अभी भी वो सपना मिल रहा है, लेकिन इसके लिए उन्हें एक खास वर्ग का हिस्सा होना पड़ेगा जो आम जनता का हिस्सा नहीं है. जैसा कि लोग कहते हैं, ये 10% लोगों का वर्ग है.’
राचेल ने आगे कहा, ‘इसलिए मुझे लगता है कि ट्रंप और उनकी सरकार अभी जो कर रहे हैं, वो सिर्फ एक खास वर्ग के लोगों की मदद कर रहा है और हम उन लोगों को भूल रहे हैं जिन्हें सुबह उठकर काम पर जाना पड़ता है, बच्चों की देखभाल करनी पड़ती है और भी बहुत कुछ.’
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वर्जीनिया के अर्लिंग्टन में भी प्रदर्शन हुए, जहां एलिसा टेनेट ने विदेश नीति और घरेलू चुनावी सुधारों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘लेकिन मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि अवैध युद्ध दूसरे देशों में अवैध रूप से घुसना और उनके नेताओं का अपहरण करना मेरे लिए एक बड़ी समस्या है.’
एलिसा आगे कहती हैं, ‘SAVE एक्ट को पारित करने की कोशिशों से भी बहुत कुछ चल रहा है, जिससे कई मतदाताओं के मताधिकार छीने जा सकते हैं और इससे लोगों के लिए मतदान करना और भी मुश्किल हो जाएगा और फिर हमारे सामने लोकतंत्र के लिए और भी मुश्किल समय आ जाएगा.’
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