ओडिशा के बहुचर्चित पार्सल बम कांड में पूर्व प्रिंसिपल को उम्रकैद, दूल्हा-दुल्हन को गिफ्ट के बॉक्स में भेजा था Bomb


दोषी पुंजीलाल मेहर
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दोषी पुंजीलाल मेहर

ओडिशा के बहुचर्चित पटनागढ़ पार्सल बम कांड में आखिरकार 8 साल बाद इंसाफ मिल गया है। इस खौफनाक घटना के मुख्य आरोपी और पूर्व कॉलेज प्रिंसिपल पुंजीलाल मेहर को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पटनागढ़ के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने यह फैसला सुनाया है।

दूल्हा-दुल्हन को गिफ्ट के बॉक्स में भेजा था बम

यह मामला साल 2018 में सामने आया था, जब शादी के कुछ ही दिनों बाद एक नवविवाहित जोड़े के घर पार्सल के रूप में मौत पहुंची थी। 26 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर सौम्यशेखर साहू और उनकी 85 साल की दादी जेमामणि साहू की इस बम धमाके में मौत हो गई थी। जबकि सौम्य की पत्नी रीमा रानी गंभीर रूप से झुलस गई थीं।

यह घटना उस वक्त हुई जब परिवार ने एक पार्सल को शादी का गिफ्ट समझकर खोला। लेकिन गिफ्ट बॉक्स में छिपा बम फट गया और पूरे घर में तबाही मच गई। शादी का जश्न एक झटके में मातम में बदल गया। जांच में सामने आया कि यह हमला किसी बाहरी आतंकी संगठन या अपराधी द्वारा नहीं, बल्कि खुद ज्योति विकास विकास जूनियर कॉलेज पूर्व कॉलेज प्रिंसिपल पुंजीलाल मेहर द्वारा प्लानिंग के तहत किया गया था। वह पहले कॉलेज में अंग्रेजी के लेक्चरर थे और उनका पीड़ित परिवार से व्यक्तिगत और पेशेवर रंजिश थी। इसी दुश्मनी के चलते उन्होंने पूरे प्लान के साथ यह साजिश रची।

कोर्ट ने दोषी पर जुर्माना भी लगाया

पुंजीलाल ने खुद बम बनाकर उसे पार्सल के रूप में भेजा और यह सुनिश्चित किया कि वह शादी के बाद दंपति तक पहुंचे। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने ज्ञान और पद का गलत इस्तेमाल करते हुए इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। इस मामले ने न सिर्फ ओडिशा बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

अब कोर्ट ने पुंजीलाल मेहर को दोहरा आजीवन कारावास और ₹50,000 जुर्माने की सजा सुनाई है । एक सजा हत्या के लिए और दूसरी गंभीर रूप से घायल करने के इरादे से किए गए अपराध के लिए। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, हालांकि उनके दिल का दर्द अब भी कम नहीं हुआ है। 

फांसी की सजा चाहता था पीड़ित परिवार

सौम्यशेखर की मां संजुक्ता साहू ने कहा कि “हम चाहते थे कि उसे फांसी की सजा मिले, लेकिन उसे उम्रकैद मिली। ये सजा उसके लिए कम है, पर ठीक है।” वहीं पटनागढ़ के जवाहरलाल कॉलेज में भूविज्ञान के लेक्चरर और सौम्यशेखर साहू के पिता रवीन्द्र साहू ने कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया रख । उन्होंने कहा,”सजा से हमें कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन मेरा बेटा और मेरी मां अब कभी वापस नहीं आएंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मैं बस यही चाहता हूं कि यह घटना सबके लिए एक सबक बने कि नफरत और जलन जैसी भावनाओं की हमारे समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस फैसले से उन लोगों को एक तरह का न्याय मिला है जो 8 साल से इस दर्दनाक हादसे के साथ जी रहे थे।  हालांकि कानूनी लड़ाई अब खत्म हो चुकी है, लेकिन यह मामला लंबे समय तक लोगों की यादों में बना रहेगा। यह एक ऐसी घटना थी जिसने खुशियों को पल भर में तबाही में बदल दिया और एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया।

ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट

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