किस काम में ‘महारथी’ हैं वो 3500 जवान, जिन्हें अमेरिका ने जंग के बीच मिडिल ईस्ट में उतारा! – us deploys 3500 marines middle east 31st meu iran ground operation tedu


अमेरिका अब ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी करता नजर आ रहा है. संयुक्त राज्य अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने बताया है कि यूएसएस त्रिपोली पर सवार 3,500 मरीन और नौसैनिकों का एक टास्क फोर्स मिडिल ईस्ट पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि पेंटागन ने ईरान के भीतर हफ़्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन का खाका तैयार कर लिया है. अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने ईरान में संभावित जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है. ऐसे में जानते हैं कि जिन जवानों को अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में भेजा है, वो कौन हैं और किस काम में माहिर हैं…

क्यों खास हैं यूएस के ये 3500 सैनिक?

यूएस सेंट्रल कमांड ने जिन 3500 सैनिकों को यूएस त्रिपोली जहाज के जरिए मिडिल ईस्ट भेजा है, वो 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट का हिस्सा है. बताया ये भी जा रहा है कि इन मरीन के साथ  ट्रांसपोर्ट और फाइटर विमान, साथ ही समुद्र और जमीन दोनों पर हमला करने वाले हथियार भी ईरान भेजे गए हैं.

31वीं एमईयू एक ऐसी फोर्स है, जिसके लिए कहा जाता है कि वो समुद्र में हमेशा तैनात रहती है और तुरंत एक्शन ही इसकी खास बात है. इसे 1 मार्च 1967 को स्पेशल लैंडिंग फोर्स एल्फा के रूप में बनाया गया था और वियतनाम में ऑपरेशन के लिए इसका गठन हुआ.  समुद्र के रास्ते किए जाने वाले ऑपरेशन में महारथ 31वीं एमईयू यूनिट एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में पानी और जमीन दोनों पर ऑपरेशन कर सकती है.

ये यूनिट समुद्र के रास्ते दुनिया के किसी भी हिस्से में काफी जल्दी पहुंच सकती है. ये मिलिट्री ऑपरेशन से लेकर राहत-बचाव तक के कार्य करती है और ये अचानक अटैक करने या फिर कम वक्त में बड़ा ऑपरेशन करने के लिए जानी जाती है. ये सिर्फ एक छोटी टुकड़ी नहीं, जबकि ये मिनी-आर्मी की तरह है. इनके पास जमीन पर लड़ने वाले सैनिक, एयरक्राफ्ट, जहाज, पानी-जमीन में चलने वाले व्हीकल होते हैं. यूएससीए के आदेश के बाद काफी जल्दी दूसरे इलाकों में ट्रांसफर होती है.

इनकी ट्रेनिंग समुद्र और समुद्र के किनारे वाली लैंड में ऑपरेशन करने के हिसाब से की जाती है. बेहतर ट्रेनिंग के जरिए यह कुछ खास समुद्री स्पेशल ऑपरेशन करने की क्षमता हासिल कर लेती है. सामान्य तौर पर MEU बहुत तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होती हैं और काफी कम समय में ये यूनिट अपने जवानों को एक जगह कर सकती है. तेजी से एक्शन ही इसकी खास बात है. कहीं भी तैनाती से पहले इसके मरीन 10 टास्क पूरे करते हैं, जिसमें अलग अलग खतरनाक लेवल हैं.

इन जवानों को समुद्री आपात ऑपरेशन, जहाज पर चढ़कर जांच, उसके अपने कब्जे में लेना, समुद्री प्लेटफॉर्म पर कब्जा और कुछ खास समुद्री सुरक्षा मिशन के लिए ही ट्रेनिंग दी जाती है. इन त्वरित एक्शन की आदत ट्रेनिंग के दौरान से ही होती है, क्योंकि उन्हें लंबी ट्रेनिंग भी कम वक्त में पूरी करनी होती है यानी एक बार में ही सही काम करना होता है.  इनके मरीन को अपनी तैयारी पूरी करने के लिए केवल 70 से 84 दिन का समय मिलता है.

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