नायक फिल्म के अनिल कपूर के मोड में बालेन शाह… प्रधानमंत्री बनने के पहले 48 घंटों में क्या-क्या फैसले लिए गए – belen shah nepal prime minister 48 hours decisions gen z protest reforms governance plan like nayak NTC agkp

ByCrank10

March 30, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


साल 2001 की फिल्म नायक में अनिल कपूर यानी शिवाजी राव गायकवाड़ सिर्फ एक दिन के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनते हैं और पूरा सिस्टम हिला देते हैं. भ्रष्टाचारियों को जेल, माफिया को सबक और आम आदमी को न्याय सब कुछ चुटकियों में. अब वही कहानी असल जिंदगी में नेपाल में हो रही है और इसके नायक हैं 35 साल के बालेन शाह.

बालेन शाह कोई पुराने घराने के नेता नहीं हैं. वे पहले रैपर थे, फिर सिविल इंजीनियर बने और तीन साल पहले काठमांडू के मेयर बनकर उन्होंने शहर की सड़कें साफ कराईं, भ्रष्टाचार रोका और पारदर्शिता लाई. लोग उन्हें प्यार से “जनता का रैपर” कहते थे.

सितंबर 2025 में नेपाल में Gen-Z आंदोलन भड़का जिसमें 76 युवाओं की जान गई. इस आंदोलन ने पुरानी पार्टियों को जड़ से हिला दिया. इसके बाद मार्च 2026 के चुनाव में बालेन की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 275 सदस्यीय संसद में 182 सीटें जीत लीं.

27 मार्च को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. शपथ से पहले उन्होंने “जय महाकाली” नाम का एक रैप सॉन्ग भी रिलीज किया जिसमें नेपाल की नई सुबह का जिक्र था.

48 घंटों में क्या-क्या हुआ?

शपथ लेने के कुछ घंटों के भीतर ही बालेन ने कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई और चार बड़े फैसले लिए जिसने पूरे नेपाल को हिला दिया. पहला और सबसे बड़ा फैसला था Gen-Z आंदोलन के शहीदों को न्याय दिलाना. गौरी बहादुर कार्की आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री को उस आंदोलन में हुई फायरिंग और दमन का जिम्मेदार ठहराया था. बालेन ने कैबिनेट से मिनटों में मंजूरी ली और 28 मार्च की शाम तक दोनों नेता जेल पहुंच गए. पूरे देश में सनसनी फैल गई और लोग कह रहे थे यह तो बिल्कुल नायक वाला सीन है.

यह भी पढ़ें: Gen-Z आंदोलन से सत्ता में आए, अब उनसे जुड़ा बवाली फैसला ले बैठे बालेन

दूसरा फैसला था कि 27 शहीद छात्रों के परिवारों को तुरंत सरकारी नौकरियां दी जाएं. बालेन ने कहा कि यह सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि उन शहीदों का कर्ज चुकाना है जिन्होंने नया नेपाल बनाने के लिए जान दी.

तीसरा फैसला था 100 दिनों का गवर्नेंस सुधार प्लान. बालेन ने सभी मंत्रालयों को साफ निर्देश दिया कि 100 दिनों में ठोस बदलाव दिखना चाहिए. शिक्षा मंत्री को सरकारी प्रवक्ता भी बनाया गया ताकि हर फैसला पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचे.

चौथा फैसला था शिक्षा में बड़ा बदलाव. स्कूलों और यूनिवर्सिटी से राजनीतिक छात्र संगठनों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई. पांचवीं कक्षा तक कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. विदेशी नाम वाले स्कूलों के नाम बदलकर नेपाली या आदिवासी नाम रखने का आदेश दिया गया. बालेन ने कहा कि अब शिक्षा राजनीति की गुलामी से आजाद होगी.

भारत को भी दिया साफ संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश का जवाब देते हुए बालेन ने लिखा कि वे दोनों देशों की समृद्धि के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक हैं. यानी पड़ोसी रिश्ते मजबूत रखते हुए घर की सफाई भी जारी है.

क्या यह रफ्तार बनी रहेगी?

फिल्म नायक में अनिल कपूर कहते थे कि उनका एक दिन पूरे साल से ज्यादा काम कर जाएगा. बालेन शाह ने 48 घंटों में यह साबित कर दिया कि तेज और ईमानदार फैसले सचमुच सिस्टम बदल सकते हैं. काठमांडू की सड़कों पर अब लोग “बालेन भाइया” के नारे लगा रहे हैं.

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह रफ्तार बनी रहेगी और क्या 100 दिनों का यह प्लान असल में जमीन पर दिखेगा. लेकिन फिलहाल एक बात तय है कि नेपाल में एक नई उम्मीद जागी है और पुराने खेल के दिन लद गए हैं.

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