स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद बाब अल मंदेब… हूतियों ने ये बंद कर दिया तो क्या होगा? – bab el mandeb strait importance houthi attacks red sea crisis tedu


ईरान की जंग के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज चर्चा में है, जिसके बाधित होने से एलपीजी आदि की सप्लाई प्रभावित हो रही है. लेकिन, मिडिल ईस्ट की इस जंग में हूतियों की एंट्री के बाद रेड सी के शिप रूट पर भी संकट गहरा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तरह अब बात बाब अल मंदेब स्ट्रेट की हो रही है, जहां से ग्लोबल मार्केट का काफी सामान गुजरता है. अगर ये रास्ता भी प्रभावित होता है तो संकट काफी ज्यादा हो सकता है. ऐसे में जानते हैं कि ये रूट कितना अहम है और जब हूतियों ने पहले यहां अटैक किया था, तब क्या हालात बन गए थे…

कहां है ये बाब अल मंदेब स्ट्रेट?

ये स्ट्रेट यमन (एशिया) और जिबूती/एरिट्रिया (अफ्रीका) के बीच है. यह रेड सी, स्वेज नहर, मेडिटेरेनियन, यूरोप का अहम रास्ता है. इसे एशिया–यूरोप के व्यापार की लाइफलाइन भी कहा जा सकता है. इसे ही स्वेज नहर का गेट कहा जाता है और इसके बिना यूरोप-एशिया समुद्री कनेक्शन टूट जाता है. इसकी चौड़ाई सिर्फ 25 से 30 किलोमीटर है और इसके आस-पास कोई अल्टरनेटिव रूट नहीं है और अगर ये बंद होता है तो जहाजों को अफ्रीका से घुमकर आना पड़ेगा. इससे करीब 15 दिन तक ज्यादा लगेंगे और शिपिंग की कॉस्ट बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी.

बता दें कि ग्लोबल बिजनेस का करीब 15 हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इस रूट से दुनिया का 10 फीसदी तेल गुजरता है और यहां से बड़ी संख्या में कंटेनर जहाज गुजरते हैं. बता दें कि यूरोप–एशिया के बीच लगभग 12–15 फीसदी वैश्विक व्यापार इसी रास्ते से होता है.

क्यों बढ़ रहा है इस पर संकट?

दरअसल, ईरान जंग के करीब एक महीने बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने इस जंग में प्रवेश कर लिया है और इजरायल की ओर मिसाइलें दागी हैं. डर है कि अगर हूती युद्ध में और एक्टिव होते हैं तो रेड सी में जहाजों को निशाना बना सकते हैं, क्योंकि उन्होंने पहले भी ऐसा किया है. इससे पहले साल 2023 में गाजा युद्ध के दौरान हूतियों ने हमास के समर्थन में इजरायल और लाल सागर में जहाजों के आवागमन को निशाना बनाया था, जिससे समुद्री यातायात बाधित हुआ था. अगर अब भी ऐसा होता है तो संकट हो सकता है.

स्ट्रेट

क्या हो सकता है असर?

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जब 2023 में यहां हूतियों ने अटैक किया था तब स्वेज नहर यातायात में 50% से अधिक की गिरावट आई थी. जहाजों को अफ्रीका के चारों ओर से होकर गुजरना पड़ा, जिससे यात्रा में 10-14 दिन अतिरिक्त लग गए. प्रमुख वैश्विक मार्गों पर माल ढुलाई लागत में भारी वृद्धि हुई थी. इसके साथ ही जहाजों के बीमा प्रीमियम दोगुने से भी अधिक हो गए थे.

बता दें कि इस दौरान 100 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया गया था और मिस्र को स्वेज नहर से होने वाली आय में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ. इस प्रकार के हमले फिर से शुरू होते हैं, तो इस बार परिणाम कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं.

अगर ये भी प्रभावित होता है होर्मुज और बाब अल मंदेब दोनों प्रभावित हो जाएंगे. ये दोनों जलमार्ग मिलकर वैश्विक तेल और व्यापार प्रवाह के एक बड़े हिस्से को संभालते हैं. रेड सी में नए सिरे से पैदा हो रहे खतरों की वजह से दुनिया के दो प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर एक साथ दबाव पड़ेगा. इससे एनर्जी की कीमतों में वृद्धि, जहाजरानी में देरी और व्यापक आर्थिक नतीजों का खतरा बढ़ जाएगा.

सऊदी अरब जैसे देश भी, जो पाइपलाइनों के माध्यम से लाल सागर तक पहुंचकर होर्मुज जलमार्ग को दरकिनार कर पा रहे थे, अगर जहाजों पर हौथी हमले तेज होते हैं तो उनके ये विकल्प भी दबाव में आ सकते हैं.

बढ़ जाएगी तेल कीमतें

अगर होर्मुज के साथ ये स्ट्रेट भी बाधित हो जाता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है. ग्लोबल शिपिंग में काफी देरी होगी और एशिया, यूरोप और उससे आगे एनर्जी सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी. यही कारण है कि हूती विद्रोहियों की सीमित कार्रवाई पर भी वैश्विक बाजार बारीकी से नजर रख रहे हैं.

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