31 मार्च यानी कल महावीर जयंती का त्योहार मनाया जाएगा. महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख पर्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ था. उनका जन्म इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के घर हुआ था. बचपन में उनका नाम वर्धमान था. उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह और राजघराने की सुख-सुविधाओं को त्याग दिया था और संन्यासी बनकर आत्मज्ञान के मार्ग पर निकल पड़े. भगवान महावीर का जीवन आज भी लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है. उन्होंने दुनिया को पंचशील सिद्धांत दिया और अंहिसा व नैतिकता का मूल्य समझाया.

पंचशील सिद्धांत क्या है?

1. अहिंसा– भगवान महावीर ने लोगों को हिंसा से दूर रहने और जाने-अनजाने किसी को कष्ट न पहुंचाने का संदेश दिया था.

2. सत्य- भगवान महावीर का कहना है था कि इंसान को हमेशा सत्य के मार्ग पर चरना चाहिए. भगवान महावीर कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ. जो बुद्धिमान सत्य के सानिध्य में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है.

3. अचौर्य- भगवान महावीर का तीसरा सिद्धांत अस्तेय या अचौर्य है. स्वामी महावीर कहते थे कि इस नियम का पालन करने वाले मनचाही चीजों को हथियाने के लिए किसी भी हद तक नहीं जाते हैं. ऐसे लोगों का अपनी इंद्रियों पर संयम और पवित्र जीवन जीना जारी रखते हैं.

4. ब्रह्मचर्य- भगवान महावीर का चौथा सिद्धांत ब्रह्मचर्य है. उनका कहना था कि जैन धर्म के अनुयायियों को पवित्र गुणों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसमें तन की शुद्धि से ज्यादा मन की शुद्धि पर जोर रखा जाता है.

5. अपरिग्रह– पांचवा और अंतिम सिद्धांत है अपरिग्रह. यह शिक्षा सभी पिछले सिद्धांतों को जोड़ती है. कहते हैं कि अपरिग्रह का पालन करने से जैनियों की चेतना जागृत होती है और वो सांसारिक सुखों का त्याग कर देते हैं.

कैसे मनाई जाती है महावीर जयंती?
महावीर जयंती के दिन लोग सुबह के वक्त प्रभात फेरी निकालते हैं. इस दौरान सड़कों पर भव्य शोभायात्रा और पालकी यात्रा का प्रदर्शन किया जाता है. फिर मंदिरों में भगवान महावीर का सोने और चांदी के कलशों से अभिषेक किया जाता है. मंदिरों के शिखरों पर ध्वजा फहराई जाती है. दिनभर धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन जारी रहते हैं. इस मौके पर लोग भगवान महावीर की शिक्षाओं को याद करते हैं और उन्हें अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं.

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