तीन जुलाई से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा

तीन जुलाई से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा

Amarnath Yatra 2025: पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस साल अमरनाथ यात्रा टाइट हाई सिक्योरिटी में होने जा रही है। अमरनाथ यात्रा 2025, 03 जुलाई से शुरू हो रही है, जो 09 अगस्त को समाप्त होगी। इस बार अमरनाथ यात्रा की कुल अवधि 38 दिनों की होगी। 2024 में अमरनाथ यात्रा 52 दिनों तक चली थी। अमरनाथ यात्रा को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद इस साल वार्षिक अमरनाथ यात्रा का आयोजन एक “चुनौती” होगी, लेकिन यात्रा के सुचारु संचालन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।

गुलमर्ग में हुई हाई लेवल मीटिंग  

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के कामकाज का आकलन करने और आगामी धार्मिक पर्वों की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए गुलमर्ग में एक हाई लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, बैठक में आपातकालीन तैयारियों, पर्यटकों की सुरक्षा, खेल और साहसिक पर्यटन, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यों की समीक्षा की गई।

“सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे”

आगामी धार्मिक आयोजनों पर विस्तृत चर्चा करते हुए, जिसमें मेला खीर भवानी, ईद, मुहर्रम और विशेष रूप से अमरनाथ यात्रा शामिल है, मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि इस वर्ष की यात्रा विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री ने बैठक में जोर देकर कहा, “सुरक्षा और साजो-सामान की दृष्टि से हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्रा सुचारू रूप से संपन्न हो। आपके अनुभव को देखते हुए मुझे विश्वास है कि सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।”

यात्रा के लिए दो रूट

पहलगाम रूट: इस रूट से गुफा तक पहुंचने में तीन दिन लगते हैं। इस यात्रा में खड़ी चढ़ाई नहीं है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी है। ये बेस कैंप से 16 KM दूर है। यहां से चढ़ाई शुरू होती है। तीन किमी चढ़ाई के बाद यात्रा पिस्सू टॉप पहुंचती है। यहां से पैदल चलते हुए शाम तक यात्रा शेषनाग पहुंचती है। ये सफर करीब 9 किमी का है। अगले दिन शेषनाग से यात्री पंचतरणी जाते हैं। ये शेषनाग से करीब 14 किमी है। पंचतरणी से गुफा सिर्फ 6 किमी रह जाती है।

बालटाल रूट: बाबा अमरनाथ दर्शन के लिए बालटाल रूट से भी जा सकते हैं। इसमें सिर्फ 14 KM की चढ़ाई चढ़नी होती है, लेकिन एकदम खड़ी चढ़ाई है, इसलिए बुजुर्गों को इस रास्ते पर दिक्कत होती है। इस रूट पर संकरे रास्ते और खतरनाक मोड़ हैं। (इनपुट- भाषा)

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