हर सेकेंड 10 लाख रुपये खर्च, ईरान जंग में पानी की तरह पैसा फूंक रहे ट्रंप! देखें- पूरा हिसाब-किताब – iran america war how much trump lost in fight NTC vhrw


मिडिल ईस्ट जंग को एक महीने से ज्यादा बीत चुका है. अमेरिका और इजरायल तमाम दावे कर रहे हैं लेकिन ईरान ने अबतक हार नहीं मानी है. अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब देते हुए ईरान खाड़ी देशों पर हमले कर रहा है. इसमें तेहरान वहां मौजूद यूएस बेसों को निशाना बनाने का दावा कर रहा है.

दरअसल, ट्रंप को लगा था कि वो 2-4 हफ्तों में बम गिरा कर ईरान को झुका लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ट्रंप को एक एक दिन भारी पड़ रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप पर जल्द से जल्द इस युद्ध को खत्म करने का दवाब इसलिए भी है क्योंकि अमेरिकी खजाने को रोज बड़ी चोट लग रही है. ईरान को बर्बाद करने में अमेरिका को भी रोज हजारों करोड़ की चपत लग रही है. इस वजह से ही वाइट हाउस की तरफ से इशारा किया जा चुका है कि ट्रंप इस युद्ध का खर्चा खाड़ी देशों से वसूलने का प्लान बना रहे हैं.

सिप्री की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति सेकंड अमेरिका 10 लाख रुपये ईरान युद्ध में खर्च कर रहा है. ईरान पर मिसाइल हमले करने में अमेरिका 3040 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है. इस हिसाब से प्रति दिन अमेरिका को 8,455 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. 28 फरवरी से 31 मार्च तक अमेरिका के 2 लाख 63 हजार करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं.

ट्रंप की टेंशन बढ़ता युद्ध खर्च है, जिसका पूरा ब्योरा भी आ चुका है. इसमें-

– बम मिसाइल पर 3034 करोड़ रुपये
– हवाई कार्रवाई पर 2337 करोड़ रुपये
– नौसेना कार्रवाई पर 1472 करोड़ रुपये
– थाड मिसाइल पर 902 करोड़ रुपये
– खुफिया और साइबर अटैक पर 427 करोड़
– लॉजिस्टिक खर्च पर 285 करोड़ रुपये प्रति दिन खर्च

इस तरह अमेरिका रोज 8455 करोड़ रुपये ईरान से लड़ने में खर्च कर रहा है. मतलब साफ है कि अमेरिका को ये युद्ध बहुत मंहगा पड़ रहा है.

जैसे-जैसे ईरान युद्ध का दायरा बढ़ रहा है, ऊर्जा संकट और भी गहरा गया है. एशिया इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित है, क्योंकि यहां के कई देश खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर हैं.

पाकिस्तान अपने तेल का लगभग 83 प्रतिशत खाड़ी देशों से लेता है जबकि बांग्लादेश लगभग 80 प्रतिशत, श्रीलंका 65 प्रतिशत उन पर निर्भर है.

वहीं नेपाल और भूटान पूरी तरह भारत पर निर्भर हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया. इनकी मदद के लिए भारत आगे आया है.

भारत ने हाल ही में कोलंबो को लगभग 38,000 मीट्रिक टन ईंधन की आपूर्ति की है. श्रीलंका के राष्ट्रपति ने अनुरा कुमारा दिसानायके ने हाल ही में X पर इसकी जानकारी दी और भारत को धन्यवाद कहा.

भूटान और नेपाल को भी भारत बिना रुके ईंधन भेज रहा है. वहीं अप्रैल तक ढाका को लगभग 40,000 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीज़ल भेजने की योजना भी बनाई गई है.

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