आधी सदी से भी ज्यादा समय के बाद, इंसान एक बार फिर चांद की दहलीज पर कदम रखने के लिए तैयार है. हफ्तों तक चले फ्यूल लीक और तकनीकी बाधाओं के बाद, नासा (NASA) ने मंगलवार को अंतरिक्ष यात्रियों की पहली चांद यात्रा के लिए उल्टी गिनती शुरू कर दी.

नासा के अधिकारियों के मुताबिक, लॉन्च पैड पर मौजूद विशाल मून रॉकेट पूरी तरह से ठीक काम कर रहा है. बुधवार शाम को होने वाले इस लॉन्च के लिए मौसम विभाग ने भी हरी झंडी दे दी है. मौसम वैज्ञानिकों ने अनुकूल परिस्थितियों की 80 प्रतिशत संभावना जताई है.

सीनियर टेस्ट डायरेक्टर जेफ स्पॉल्डिंग ने इस मिशन के अहमियत पर जोर देते हुए कहा, ‘हर कोई काफी एक्साइटेड है और इस लॉन्च की अहमियत को समझता है.’

आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों को चुना गया है. ये 1972 में ‘अपोलो 17’ मिशन के बाद चांद की यात्रा करने वाले पहले इंसान होंगे. इस मिशन के तहत ये यात्री चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे, हालांकि वो सतह पर उतरेंगे नहीं और न ही ओरबिट में रुकेंगे. वो चांद का चक्कर लगाकर सीधे पृथ्वी पर वापस लौट आएंगे.

चुनौतियों पर पाया काबू

आर्टेमिस II के लॉन्च के करीब पहुंचने की ये नासा का सबसे बड़ी कोशिश है. इससे पहले हाइड्रोजन फ्यूल लीक की वजह से इस उड़ान को फरवरी से मार्च तक टालना पड़ा था. इसके बाद हीलियम लाइनों में रुकावट आने की वजह से इसे अप्रैल तक खिसकाना पड़ा था.

अंतरिक्ष एजेंसी के पास हर महीने सिर्फ कुछ ही दिन ऐसे होते हैं, जब वो तीन अमेरिकी और एक कनाडाई नागरिक को चांद पर भेज सकते हैं. लॉन्च टीम को अब पूरा भरोसा है कि सभी तकनीकी समस्याओं को ठीक कर लिया गया है.

लॉन्च की तैयारी

लॉन्च टीम बुधवार सुबह 32 मंजिला ऊंचे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) रॉकेट में ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू करेगी. अगर सब कुछ सही रहा तो बुधवार शाम को ये रॉकेट अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ऐतिहासिक सफर पर रवाना हो जाएगा.

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