उत्तर प्रदेश में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. प्रदेश सरकार एक बार फिर संशोधित प्रस्ताव तैयार कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार, इस बार प्रस्ताव में 1994 बैच तक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिससे चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके.

दरअसल, पिछले महीने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को UPSC ने कुछ आपत्तियों के साथ वापस कर दिया था. आयोग ने खास तौर पर डीजीपी पद खाली होने के बाद की वरिष्ठता सूची और संबंधित अधिकारियों की सर्विस डिटेल पर अधिक स्पष्ट जानकारी मांगी थी. इसके बाद राज्य सरकार ने अपनी तैयारी दुरुस्त करते हुए सभी जरूरी दस्तावेज, वरिष्ठता क्रम और सर्विस रिकॉर्ड को अपडेट कर लिया है.

अब संशोधित प्रस्ताव में इन सभी तथ्यों को विस्तार से शामिल किया जा रहा है, ताकि इस बार फाइल बिना किसी आपत्ति के आगे बढ़ सके. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकार इस नियुक्ति को अब और लंबा नहीं खींचना चाहती, क्योंकि राज्य के शीर्ष पुलिस पद पर लंबे समय से स्थायी नियुक्ति न होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं.

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प्रक्रिया के तहत, UPSC राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नामों में से वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार करेगा. यह पैनल वापस राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जिसके बाद सरकार इनमें से किसी एक अधिकारी को प्रदेश का स्थायी डीजीपी नियुक्त करेगी.

इस बीच, प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण पर सरकार का भरोसा कायम है. ऐसे में उन्हें स्थायी डीजीपी बनाए जाने की संभावना सबसे अधिक जताई जा रही है. हालांकि अंतिम निर्णय UPSC द्वारा भेजे गए पैनल के आधार पर ही लिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद देरी की गुंजाइश कम है, और ऐसे में अगर सब कुछ तय प्रक्रिया के मुताबिक हुआ तो यूपी पुलिस को जल्द ही नया नहीं, बल्कि स्थायी DGP मिल सकता है. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि UPSC कब तक पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजता है. अगर प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है, तो उत्तर प्रदेश को जल्द ही स्थायी डीजीपी मिल सकता है, जिससे पुलिस महकमे में स्थिरता और प्रशासनिक स्पष्टता आएगी.

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