हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 2025-26 के अंत में 18 तेजस Mk1A विमान तैयार करके टार्मैक पर खड़े कर दिए हैं. ये विमान अब भारतीय वायुसेना के मूल्यांकन का इंतजार कर रहे हैं. IAF अप्रैल में पहले पांच तेजस Mk1A विमानों की पूरी जांच करेगा.

एयर फोर्स के सूत्रों ने बताया कि इन विमानों की लड़ाकू क्षमता की पूरी जांच होने के बाद ही उन्हें आधिकारिक तौर पर शामिल किया जाएगा. भारतीय वायुसेना ने साफ कर दिया है कि तेजस Mk1A को शामिल करने से पहले तीन महत्वपूर्ण लड़ाकू क्षमताओं पर कोई समझौता नहीं होगा.

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  • पहला – मिसाइल फायरिंग क्षमता. एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल फायरिंग ट्रायल्स को पूरा प्रमाणित करना जरूरी है.
  • दूसरा – रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सिस्टम का पूरा इंटीग्रेशन. यह दुश्मन वाले क्षेत्र में विमान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है.
  • तीसरा – हथियार वितरण प्रणाली और फायर कंट्रोल आर्किटेक्चर की पूरी जांच.

तेजस एमके1ए का परीक्षण

IAF के सूत्र कहते हैं कि ये तीनों चीजें Mk1A के फाइटिंग के बैकबोन हैं. इन्हें किसी भी हालत में कमजोर नहीं किया जाएगा. छोटी-मोटी या कागजी चीजें बाद में भी पूरी की जा सकती हैं.

ट्रायल्स में क्या जांच होगी और कब होगा इंडक्शन

मिसाइल फायरिंग ट्रायल्स पहले ही पूरा हो चुके हैं. रडार-EW इंटीग्रेशन और हथियार सिस्टम की जांच अंतिम चरण में है. अप्रैल में IAF इन सभी डेटा की पूरी समीक्षा करेगा. समीक्षा के बाद स्वीकृति ट्रायल्स शुरू होंगे, जो कुछ हफ्ते चल सकते हैं. इन ट्रायल्स में सफलता मिलने के बाद ही विमानों को फ्रंटलाइन स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा. IAF इस पूरी प्रक्रिया को जल्दी पूरा करना चाहता है, लेकिन लड़ाकू क्षमता से कोई समझौता नहीं करेगा.

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तेजस Mk1A की डिलीवरी में करीब दो साल की देरी हो चुकी है. HAL का कहना है कि मुख्य कारण GE इंजन की सप्लाई में देरी है. HAL चेयरमैन ने हाल ही में बताया कि पांच विमान पूरी तरह तैयार हैं. IAF से स्वीकृति की चर्चा चल रही है. IAF चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पहले कहा था कि वायुसेना को नए विमानों की बहुत जरूरत है. इस साल पहले ही तीसरा तेजस विमान खोने के बाद बची हुई फ्लीट की भी जांच चल रही है.

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दोहरी पाइलन पर ASRAAM मिसाइल की तस्वीर

HAL ने हाल ही में एक तस्वीर जारी की है जिसमें तेजस Mk1A पर ASRAAM शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल को दोहरी पाइलन पर लगाया गया है. इस व्यवस्था से एक स्टेशन पर दो मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जिससे विमान की मारक क्षमता बढ़ जाती है.

IAF तेजस Mk1A को जल्दी शामिल करना चाहता है, लेकिन लड़ाकू क्षमता से कोई समझौता नहीं करेगा. अप्रैल में शुरू होने वाले ट्रायल्स के बाद ही इंडक्शन का फैसला होगा. HAL इंजन मिलते ही डिलीवरी तेज करने के लिए तैयार है. यह पूरी प्रक्रिया IAF की स्क्वाड्रन ताकत बढ़ाने और आधुनिक विमानों से सीमा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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