Hanuman Jayanti 2026: बजरंगबली सिर्फ इंसानों के ही नहीं, देवताओं के भी संकटमोचन – Hanuman Jayanti 2026 sankatmochan bajranbali laxman sanjeevani sugriva shani arjun tvisu


2 अप्रैल यानी कल हनुमान जयंती मनाई जाएगी. हनुमान जी के कई नाम हैं. कोई उन्हें बजरंगबली कहता है तो कोई केसरी नंदन. कोई रामदूत कहकर पुकारता है तो कोई महावीर. लेकिन मुसीबत में फंसा हर इंसान उन्हें संकटमोचन कहता है. संकटमोचन यानी कष्टों को हरने वाला है. कहते हैं कि संकटमोचन हनुमान का नाम लेने भर से इंसान की तकलीफें खत्म हो जाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बजरंगबली सिर्फ इंसानों के ही नहीं, बल्कि देवताओं के भी संकटमोचन हैं. उन्होंने कई बड़े योद्धाओं, देवताओं को मुसीबत से निकाला था.

राम जी की नैय्या पार लगाई
रामायण के अनुसार, जब रावण माता सीता को लेकर लंका चला गया था, तब हनुमान जी ने ही अपनी चमत्कारी शक्तियों से सीता की वापसी संभव बनाई. हनुमान जी ने समुद्र पार कर सीता माता को खोज निकाला. रावण की लंका में जलाई. और युद्ध में भगवान राम का साथ देकर उन्हें विजयी बनाने में अहम भूमिका निभाई.

लक्ष्मण को संजीवनी
युद्ध में रावण के बेटे मेघनाद के तीर से लक्ष्मण बुरी तरह घायल हो गए थे और मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ थे. उनके प्राण संजीवनी बूटी से ही बचाए जा सकते थे. तब हनुमान जी संजीवनी बूटी का पूरा पहाड़ ही उठा लाए थे. इस तरह उन्होंने लक्ष्मण की जान बचाई.

शनि देव को मुक्ति
रावण ज्योतिष शास्त्र का बड़ा विद्वान था. उसने अपने बेटे की कुंडली में उठा-पटक मचाने वाले तमाम ग्रहों को अपने वश में कर लिया था. कुंडली में शनि की स्थिति से रावण ज्यादा परेशान था, इसलिए उसने शनि को लंका में कैद करके ही रख लिया. हालांकि जब हनुमान जी माता सीता को खोजने लंका पहुंचे तो उन्होंने शनि देव को रावण की कैद से आजाद कराया था.

सुग्रीव को दिलाया राज्य और सम्मान
वानरराज सुग्रीव अपने भाई बाली से बड़ा भय खाते थे. बाली के कारण सुग्रीव अपना राजपाट छोड़ वन में छिपकर रहने के लिए मजबूत थे. वो हनुमान ही थे जिन्होंने सुग्रीव को राम से मिलाया. फलस्वरूप राम और हनुमान के प्रयासों के चलते ही बाली का वध हुआ और सुग्रीव को अपना खोया हुआ सम्मान और राज्य दोनों मिल गए.

अर्जुन का रथ
महाभारत के युद्ध में भी हनुमान जी अर्जुन के रथ पर सवार थे. पूरे युद्ध में वो अस्त्र-शस्त्र से अर्जुन की रक्षा करते रहे. जिस सूर्यपुत्र कर्ण के एक प्रहार से रणभूमि में त्राहिमाम मच जाता था, उसके बाण अर्जुन के रथ को एक कदम भी पीछे नहीं धकेल पाते थे. इसकी वजह यही थी कि रथ के शीर्ष पर बैठे हनुमान अर्जुन की रक्षा कर रहे थे.

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