ना यूरेनियम मिला, ना बदली सत्ता… ईरान के विध्वंसक पलटवार से क्या झुक गए डोनाल्ड ट्रंप? – middle east war iran israel america conflict donald trump uturn ntc mkg


ईरान और अमेरिका-इजरायल जंग के बीच बीते 24 घंटे में जो संकेत सामने आए हैं, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि कुछ ही घंटों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम का ऐलान कर सकते हैं. यह भी माना जा रहा है कि ट्रंप 6 अप्रैल की अपनी तय डेडलाइन से पहले ही ईरान के खिलाफ हमलों को रोक सकते हैं.

इसके साथ यह सवाल गहरा हो गया है कि क्या ट्रंप ने इस जंग को लेकर यू-टर्न लेने का मन बना लिया है. जिस तरह से हालात बदले हैं, उससे यह भी माना जा रहा है कि ईरान के पलटवार ने अमेरिका को दबाव में ला दिया है. ट्रंप के हालिया बयान इस दिशा में इशारा करते हैं. उन्होंने कहा है कि यह युद्ध ज्यादा से ज्यादा 2 या 3 हफ्तों में खत्म हो जाएगा.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने यह भी कह दिया कि होर्मुज स्ट्रेट खुले या ना खुले, अमेरिका ईरान से निकल जाएगा. इसके साथ ही सस्पेंस भी बना हुआ है. ट्रंप भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 6.30 बजे देश को संबोधित करने वाले हैं. दुनिया की नजर उनके संबोधन पर टिकी है. व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने जानकारी दी है.

उसके अनुसार ट्रंप बुधवार रात 9 बजे (अमेरिकी समय) देश को संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि इसमें वह बड़ा एलान कर सकते हैं. 33 दिन की इस जंग का आकलन करें, तो अमेरिका और इजरायल अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाए हैं. इस युद्ध के दो बड़े मकसद थे. ईरान के 440 किलो यूरेनियम को हासिल करना और सत्ता परिवर्तन लाना.

ईरान था

दोनों ही मोर्चों पर ट्रंप और नेतन्याहू नाकाम रहे. इसके उलट, ईरान ने हर हमले का जवाब दिया. IRGC ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तगड़े हमले किए. इतना ही नहीं, होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित कर वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर दिया. नतीजा यह हुआ कि ट्रंप की तमाम धमकियों के बावजूद ईरान अपने रुख से नहीं हटा.

इस बीच, ट्रंप ने इस्फहान में हथियारों के ठिकानों पर 907 किलो के बंकर बस्टर बम गिराए. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह हमला जंग से निकलने से पहले ताकत दिखाने की रणनीति थी. क्योंकि इससे पहले ट्रंप ने 6 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया था कि यदि होर्मुज नहीं खुला तो ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा.

हालांकि, अब उनके सुर बदलते नजर आ रहे हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान भी इसी ओर इशारा करता है. उन्होंने कहा, “हम मंजिल देख सकते हैं. यह आज नहीं, कल नहीं, लेकिन बहुत जल्द सामने होगी.” इससे साफ है कि अमेरिका अब जंग के अंत की ओर बढ़ रहा है. अब सबसे बड़ा सवाल है कि ट्रंप अपने संबोधन में क्या कहेंगे.

क्या वह युद्धविराम का ऐलान करेंगे? क्या कोई नई डेडलाइन देंगे? क्या वह इसे अपनी जीत बताकर बाहर निकलने की कोशिश करेंगे? या फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई शर्तें रखेंगे? दूसरी ओर, ईरान का रुख बिल्कुल साफ है. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि देश लंबे समय तक युद्ध लड़ने के लिए तैयार है. अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा.

ईरान था

इस जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है. UNDP की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट आ सकती है. करीब 18 लाख करोड़ रुपए का नुकसान अनुमानित है. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही 70% तक घट गई है. तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. 16 से 36 लाख नौकरियां खतरे में हैं.

अमेरिका को इस जंग में अपने सहयोगियों का भी साथ नहीं मिला. ब्रिटेन, इटली, स्पेन, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने साफ कर दिया कि यह उनकी लड़ाई नहीं है. NATO का सदस्य होने के बावजूद तुर्किए ने मध्यस्थता का रास्ता चुना. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी साफ कहा कि यह युद्ध उनका नहीं है.

ऐसे में ट्रंप NATO देशों पर खुलकर भड़क गए. उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि सहयोगी देशों को तेल चाहिए तो वे खुद होर्मुज से इंतजाम करें. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हमेशा अपने साथियों के लिए खड़ा रहा, लेकिन इस बार कोई भी उनके साथ नहीं आया. जबकि अमेरिका ने यूक्रेन की मदद की थी.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बात साफ है कि जंग 4 हफ्तों से ज्यादा समय से जारी है, लेकिन नतीजा नहीं निकला. होर्मुज स्ट्रेट अब भी संकट में है. दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है. ईरान, भारी नुकसान के बावजूद, जंग में डटा हुआ है. इस तरह जंग और कूटनीति दोनों मोर्चों पर तस्वीर यह बनती दिख रही है कि ईरान अमेरिका और इजरायल पर भारी पड़ा है.

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