नासा का आर्टेमिस II मिशन 54 साल बाद इंसानों को चांद की ओर ले जाने वाला पहला मानव मिशन है. यह मिशन सिर्फ एक उड़ान नहीं है, बल्कि मानवता के लिए अंतरिक्ष यात्रा के नए युग की शुरुआत है. 1972 में अपोलो 17 के बाद पहली बार इंसान चांद के पास जाएंगे.
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में बैठकर चांद के चारों ओर घूमेंगे और वापस आएंगे. यह लैंडिंग मिशन नहीं है, लेकिन यह भविष्य में चांद पर उतरने और वहां लंबे समय तक रहने की नींव रखेगा.
हम चंद्रमा के चारों ओर जा रहे हैं. आओ हमारे साथ देखो. आर्टेमिस II का चार-अंतरिक्ष यात्री दल उड़ान भर रहा है @NASAKennedy लगभग 10-दिवसीय मिशन पर जो हमें चंद्रमा और मंगल ग्रह पर रहने के करीब लाएगा। लॉन्च विंडो शाम 6:24 बजे ईटी (2224 यूटीसी) पर खुलती है। https://t.co/X27QJejNDt
– नासा (@NASA) 1 अप्रैल, 2026
54 साल बाद इस मिशन की जरूरत क्यों पड़ी?
अपोलो कार्यक्रम 1972 में खत्म होने के बाद अमेरिका ने चांद पर जाने का कार्यक्रम बंद कर दिया था. उस समय राजनीतिक और आर्थिक कारणों से पृथ्वी की कक्षा (Low Earth Orbit) पर फोकस शिफ्ट हो गया. लेकिन अब दुनिया बदल गई है. चांद पर पानी, खनिज और अन्य संसाधन हैं जो भविष्य की स्पेस इकोनॉमी के लिए जरूरी हैं. इसलिए नासा ने आर्टेमिस कार्यक्रम शुरू किया. आर्टेमिस II इस कार्यक्रम का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण मिशन है जो इंसानों को चांद की ओर वापस ले जाएगा.

