‘इंसानियत की हदें पार…’ अमेरिका-इजरायल को ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने बताया ‘बेरहम’ – iran supreme leader mojtaba khamenei calls us israel ruthless enemy ntc drmt


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग को 34 दिन हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज जंग को लेकर खास संबोधन करने वाले हैं. इससे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल को ‘बेरहम दुश्मन’ करार दिया है. मोजतबा ने कहा कि ये दोनों देश इंसानियत और नैतिकता की तमाम हदें पार कर चुके हैं.

‘इस्लामिक रिपब्लिक डे’ के मौके पर ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक पत्र के जरिए अमेरिका और इजरायल पर अपना पक्ष रखा. इसमें उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘बेरहम अमेरिका और यहूदी दुश्मन के लिए इंसानियत, नैतिकता या जिंदगी का कोई मोल नहीं है.’

खामेनेई ने पत्र में ‘शजरेह तैयबा स्कूल’पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की. तेहरान का दावा है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के पहले ही दिन इस स्कूल को निशाना बनाया गया था, जिसमें बच्चों और शिक्षकों सहित 175 से अधिक लोग मारे गए थे.

ईरान में ‘नेचर डे’ भी मनाया गया. इस बारे में बात करते हुए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा, ‘ईरान के लोग अपनी धरती पर उम्मीद के बीज बोते हैं ताकि, अल्लाह ने चाहा तो, आने वाले सालों में इनमें से हर पौधा एक नेक और फल देने वाला पेड़ बन जाएगा.’

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खामेनेई ने एक और बयान में ऐलान किया कि ईरान मिडिल-ईस्ट में इजरायल विरोधी ताकतों को अपना समर्थन देना जारी रखेगा. लेबनानी समूह हिजबुल्लाह को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा, ‘मैं ऐलान करता हूं कि दिवंगत इमाम और शहीद नेता के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की नीति, इजरायल-अमेरिका के खिलाफ विरोध का समर्थन जारी रखने का समर्थन करती है.’

सुप्रीम लीडर की स्थिति पर सस्पेंस

बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है. अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों का मानना है कि वो शुरुआती हमलों में घायल हुए थे और फिलहाल कहीं छिपे हुए हैं. उनके सभी मैसेज भी अब तक सिर्फ पत्र के रूप में आए हैं जिन्हें टीवी चैनलों पर पढ़ा जा रहा है.

इस्लामिक रिपब्लिक डे की अहमियत

इस्लामिक रिपब्लिक डे  1979 की ईरानी क्रांति के ठीक बाद हुए जनमत संग्रह के परिणामों की याद में मनाया जाता है. इसके बाद ही ईरान को एक आधिकारिक ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ घोषित किया गया था.

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