सर्जिकल स्ट्राइक की बात पर थरूर पर फिर चिढ़ी कांग्रेस, क्या पार्टी के दरवाजे बंद होंगे? – Congress again got angry with Tharoor on the issue of surgical strike, will the doors of Congress be closed opns2


शशि थरूर के सर्जिकल स्ट्राइक संबंधी बयानों पर कांग्रेस की नाराजगी ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां से पार्टी में उनके लिए अब पहले जैसी स्थिति संभव नहीं है. कांग्रेस नेताओं द्वारा थरूर को प्रधानमंत्री मोदी का सुपर स्पोक्स्पर्सन कहे जाने की चर्चा यूं ही नहीं है. थरूर के हाल के बयानों, खासकर पनामा में दिए गए भाषण में, जिसमें उन्होंने कहा कि 2016 में मोदी सरकार के तहत पहली बार भारत ने नियंत्रण रेखा (LoC) पारकर सर्जिकल स्ट्राइक की गई, कांग्रेस पार्टी के भीतर थरूर के लिए तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है. यह विवाद न केवल थरूर की व्यक्तिगत राय और पार्टी लाइन के बीच टकराव को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या वह वास्तव में वो बीजेपी या मोदी सरकार के पक्ष में बोल रहे हैं.

कांग्रेस की नाराजगी के कारण

कांग्रेस पार्टी का मानना है कि थरूर के बयान पार्टी की लाइन से मेल नहीं खाते. पार्टी यह दावा करती रही है कि यूपीए सरकार के दौरान भी कई सर्जिकल स्ट्राइक हुई थीं, हालांकि उन्हें प्रचारित नहीं किया गया. थरूर का यह कहना कि 2016 में पहली बार LoC पार किया गया, पार्टी के दावे को कमजोर करता है.  कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि यूपीए के तहत भी सर्जिकल स्ट्राइक हुई थीं. पर वरिष्ठ नेता उदित राज ने थरूर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें बीजेपी का सुपर प्रवक्ता करार दिया. उदित राज, थरूर पर कुछ ज्यादा कड़ा प्रहार करते हैं और थरूर के कृत्य को पार्टी के प्रति बेईमानी कहते हैं. जयराम रमेश जैसे नेताओं ने भी उदित राज के X पोस्ट को रिपोस्ट कर थरूर के खिलाफ पार्टी की नाराजगी को और स्पष्ट कर दिया है. जाहिर है कि थरूर के लिए अब कांग्रेस में दिन बिताना मुश्किल हो जाएगा.

थरूर अपने बचाव में कहते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी कहा एक भारतीय के रूप में कहा न कि पार्टी प्रवक्ता के रूप में. उन्होंने यह भी कहा कि वह ट्रोल्स और आलोचकों के साथ बहस में समय बर्बाद नहीं करना चाहते, क्योंकि उनके पास बेहतर काम हैं. हालांकि, पार्टी के भीतर कुछ नेताओं का मानना है कि थरूर ने लक्ष्मण रेखा पार कर ली है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर और मोदी सरकार की आतंकवाद विरोधी नीतियों की तारीफ करके.

क्या थरूर वाकई बनेंगे मोदी के सुपर स्पोक्स्पर्सन

उदित राज का यह बयान कि थरूर बीजेपी के सुपर प्रवक्ता हैं, एक अतिशयोक्ति भरा तंज है.  कांग्रेस के भीतर थरूर की स्थिति और उनकी स्वतंत्र राय रखने की प्रवृत्ति कोई आज कल की बात नहीं है. थरूर बहुत पहले से मुद्दों के आधार पर कई बार मोदी सरकार की तारीफ कर चुके हैं. थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ चुनाव लड़ने का साहस भी दिखाया था. पिछले कुछ दिनों से थरूर को पार्टी में घुटन महसूस हो रही है. पिछले दिनों उनके बयानों से ऐसा महसूस हुआ था.हालांकि थरूर बार-बार पार्टी छोड़ने और बीजेपी में जाने की बातों से इनकार करते रहे हैं. पर अब ऐसी स्थितियां बन रही हैं कि थरूर के लिए पार्टी से बाहर जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचने वाला है.

थरूर की स्वतंत्र छवि से कांग्रेस असहज

थरूर ने हमेशा खुद को एक स्वतंत्र विचारक के रूप में प्रस्तुत किया है, जो राष्ट्रीय हितों को पार्टी लाइन से ऊपर रखते हैं. पनामा में उनके बयान, जिसमें उन्होंने 2016 की उरी सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट स्ट्राइक की तारीफ की, को उन्होंने एक भारतीय के रूप में राष्ट्रीय एकता और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रुख के समर्थन के रूप में उचित ठहराया. उनका कहना था कि भारत ने आतंकवादियों को यह संदेश दिया कि उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी. यह रुख बीजेपी की आतंकवाद विरोधी नीति के साथ दिखता है, इसके चलते कांग्रेस को खुद को असहज महसूस करने लगती है. क्योंकि पार्टी का मानना है कि इस तरह के बयान मोदी सरकार को क्लीन चिट दे देता है.

कांग्रेस के भीतर आंतरिक राजनीति

थरूर की लोकप्रियता और स्वतंत्र राय ने पार्टी के कुछ नेताओं, जैसे उदित राज, जयराम रमेश और पवन खेड़ा, को असहज किया है. कुछ का मानना है कि राहुल गांधी के करीबी नेताओं, जैसे केसी वेणुगोपाल, थरूर की बढ़ती लोकप्रियता को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वह केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में उभर सकते हैं. उदित राज का सुपर स्पोक्स्पर्सन वाला तंज और जयराम रमेश का कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना वाला बयान इस आंतरिक खींचतान को दर्शाता है.

दूसरी ओर बीजेपी नेताओं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अमित मालवीय ने थरूर के बयानों का समर्थन किया. यह कहते हुए कि वह राष्ट्रीय हित में बोल रहे हैं और कांग्रेस को राजनीतिक हताशा छोड़नी चाहिए. बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि सेना और RTI जवाब थरूर के 2016 के दावे का समर्थन करते हैं. यह समर्थन थरूर को कांग्रेस के लिए और संदिग्ध बनाता है, क्योंकि यह बीजेपी के नैरेटिव को मजबूत करता है. दूसरी ओर, कांग्रेस का मानना है कि थरूर के बयान सरकार को कवर फायर दे रहे हैं, खासकर जब वह डोनाल्ड ट्रम्प के मध्यस्थता के दावों पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

मनीष तिवारी, आनंद शर्मा आदि सभी मोदी के कसीदे पढ़ रहे पर हमले थरूर पर ही क्यों ?

शशि थरूर कांग्रेस के सबसे चर्चित और लोकप्रिय नेताओं में से हैं, जिनकी वैश्विक छवि, लेखन, और सोशल मीडिया (विशेषकर X) पर मजबूत उपस्थिति उन्हें एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाती है. मनीष तिवारी और आनंद शर्मा ने भी सरकार की आतंकवाद विरोधी नीतियों की प्रशंसा की, लेकिन उनकी टिप्पणियां कम विवादास्पद रहीं हैं पर उनकी राय पर उतनी चर्चा नहीं होती. थरूर की स्वतंत्र राय और उनकी वैश्विक मंचों पर खुली प्रशंसा जैसे, न्यूयॉर्क में भारतीय डायस्पोरा को संबोधित करने के चलते वो पार्टी के निशाने पर आ गए.

इसके अलावा थरूर की केरल में लोकप्रियता और संभावित मुख्यमंत्री पद की दावेदारी ने पार्टी के कुछ नेताओं, खासकर राहुल गांधी के करीबी नेताओं जैसे केसी वेणुगोपाल, को असहज किया है. 2026 में केरल विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और थरूर की स्वतंत्र छवि और सरकार के साथ सहयोग ने पार्टी नेतृत्व को यह डर हो गया है कि वह यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के भीतर अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं. मनीष तिवारी और आनंद शर्मा, जो पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों से हैं, ऐसी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा का सामना नहीं करते.

इसके साथ ही बीजेपी नेताओं, जैसे किरेन रिजिजू और अमित मालवीय का थरूर के बयानों का खुलकर समर्थन करना भी कांग्रेस नेताओं को असहज कर दिया है.



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