चीन ने दक्षिण चीन सागर में द्वीप बनाने का काम लगभग दस साल बाद फिर तेज कर दिया है. अब वह एक अनजाने से रीफ को अपने सबसे बड़े सैन्य बेस में बदल रहा है. इस जगह का नाम है एंटीलोप रीफ. यहां कंस्ट्रक्शन तेजी से चल रहा है. सैटेलाइट फोटे से पता चल रहा है कि चीन जेटी, हेलीपैड, बड़ी-बड़ी बिल्डिंग और रनवे बना रहा है.

एंटीलोप रीफ पैरासेल द्वीप समूह में है. चीन इस क्षेत्र पर अपना पूरा नियंत्रण रखता है, हालांकि वियतनाम और ताइवान भी यहां दावा करते हैं. अभी तक यहां लगभग 1490  एकड़ जमीन बनाई जा चुकी है. यह क्षेत्र चीन के सबसे बड़े आउटपोस्ट मिसचीफ रीफ जितना बड़ा हो चुका है.

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WSJ की रिपोर्ट के अनुसार, यहां रनवे, मिसाइल फैसिलिटी, निगरानी स्टेशन और नौसेना के लिए लगून बनाया जा रहा है. चीन का कहना है कि यह निर्माण सिर्फ नागरिक सुविधाओं के लिए है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पूरी तरह सैन्य बेस बनेगा.

चीन सैन्य बेस एंटेलोप रीफ

इस बेस का सामरिक महत्व क्यों है?

एंटीलोप रीफ चीन की मुख्य भूमि के काफी करीब है, इसलिए यहां से सैन्य विमान और जहाज आसानी से ऑपरेट कर सकते हैं. अगर ताइवान पर कोई जंग हुआ तो यह बेस बहुत उपयोगी साबित होगा. यहां से पनडुब्बियां, युद्धपोत और लड़ाकू विमान आसानी से तैनात किए जा सकते हैं.

चीन के पास पहले से पैरासेल में वुडी द्वीप पर बड़ा बेस है, लेकिन एंटीलोप रीफ उसका बैकअप बनेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बेस चीन को दक्षिण चीन सागर में और मजबूत स्थिति देगा. वियतनाम ने इस निर्माण का कड़ा विरोध किया है. उसने कहा है कि पैरासेल द्वीप समूह पर चीन का कोई अधिकार नहीं है.

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चीन का दावा है कि यह उसका अपना क्षेत्र है. यहां निर्माण नागरिक सुविधाओं के लिए किया जा रहा है. 2016 में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने चीन के नो-डैश लाइन दावे को खारिज कर दिया था, लेकिन चीन उस फैसले को मानने से इनकार करता है.

चीन सैन्य बेस एंटेलोप रीफ

अमेरिका की चिंता

अमेरिका इस कंस्ट्रक्शन को लेकर परेशान है. अमेरिकी नौसेना के प्रमुख एडमिरल डैरिल कॉडल ने कहा कि यह समुद्री कानून का उल्लंघन है. अमेरिका फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों का समर्थन करता है. चीन के द्वीप निर्माण को रोकने की कोशिश कर रहा है.

चीन ने यह काम इसलिए तेज किया क्योंकि अमेरिका का ध्यान फिलहाल वेनेजुएला और ईरान पर है. चीन को लगा कि इस समय कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आएगी. साथ ही वियतनाम भी स्प्रैटली द्वीप समूह में अपना निर्माण तेज कर रहा है, इसलिए चीन जवाबी कदम उठा रहा है.

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