मिडिल ईस्ट में एक महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष अब और तेज हो गया है, जिसमें अमेरिका, ईरान, इजरायल और क्षेत्रीय शक्तियां आमने-सामने हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्टोन एज में भेजने की धमकी दी है. उनके इस बयान के बाद ईरान पर अमेरिकी हमले तेज हो गए हैं. वहीं, ईरान भी पूरे दमखम के साथ जवाबी हमले कर रहा है.
अमेरिका के दावों के बावजूद कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो गई है, तेहरान ने इजरायल और मिडिल ईस्ट में अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर नए हमले जारी रखे हैं. ईरान के इस्लामिक रिवोन्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाया है. उसने बहरीन में अमेजन के क्लाउड कम्प्यूटिंग सेंटर और दुबई में ओरेकल के डेटा सेंटर पर हमले का दावा किया है.
बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने एक इमरजेंसी अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगले 24-48 घंटों में ईरान समर्थित मिलिशिया संगठन हमले कर सकते हैं, और अपने नागरिकों से तुरंत इराक छोड़ने को कहा है. इधर इजरायल ने कहा कि छह घंटे के भीतर ईरान ने मिसाइल हमलों की कम से कम चार लहरें दागीं. इजरायल के मुताबिक कई मिसाइलों को उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन कुछ मिसाइलें उसके मध्य क्षेत्रों में गिरीं, जिसमें जानमाल का नुकसान हुआ है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे और हमलों के संकेत देते हुए कहा है कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़े प्रहार किए जाएंगे, हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान अपने लक्ष्य के करीब पहुंच चुका है. इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा, जहां तेल की कीमतों में 4% से अधिक की तेजी आई. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सप्लाई बाधित होने के कारण स्थिति और बिगड़ रही है.

