Protein Intake and Timing: प्रोटीन लेने का सही समय क्या है? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती – protein timing importance muscle growth expert advice weight loss muscles bulding tvism

ByCrank10

April 3, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


प्रोटीन ऐसा पोषक तत्व है जिसकी हर किसी को जरूरत होती ही है. हां, शरीर की जरूरत, जेंडर और फिजिकल एक्टिविटी के हिसाब से प्रोटीन की मात्रा बदलती रहती है. प्रोटीन के लिए लोग वेट-नॉनवेज और प्रोटीन शेक आदि को डाइट में शामिल करते हैं. लेकिन क्या आपने नोटिस किया है, जिम में पसीना बहाने वाले अधिकतर लोगों के दिमाग में एक बात पत्थर की लकीर की तरह बैठी होती है कि वर्कआउट खत्म होते ही 30 मिनट के अंदर प्रोटीन शेक पी लेना चाहिए. लेकिन क्या विज्ञान भी इस बात का समर्थन करता है? हालिया रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो प्रोटीन की टाइमिंग से कहीं ज्यादा जरूरी कुछ और है जिसका आपको ध्यान रखना चाहिए.

वर्कआउट के बाद 30 मिनट में प्रोटीन लेना जरूरी है?

लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि मसल्स की रिकवरी और ग्रोथ के लिए एक्सरसाइज के बाद प्रोटीन लेना जरूरी है. लेकिन करीब 3000 वयस्कों पर की गई एक बड़ी स्टडी बताती है कि मसल बिल्डिंग के लिए यह मायने नहीं रखता कि आपने प्रोटीन वर्कआउट के तुरंत बाद लिया या कुछ घंटों बाद. असल में आप अपने शरीर को दिनभर में कितना प्रोटीन दे रहे हैं, ये बात अधिक जरूरी है. अगर आप दिन भर में पर्याप्त प्रोटीन ले रहे हैं तो मसल्स की ग्रोथ और मसल्स की मरम्मत सही तरीके से होती है.

कब और कैसे लें प्रोटीन?

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भले ही वर्कआउट के बाद 30 मिनट के अंदर प्रोटीन लेने की बात पर उतना ध्यान न दिया जाए लेकिन हम सलाह देते हैं कि प्रोटीन की कुल मात्रा को दिनभर की मील में बांटकर लेंगे तो अच्छा रहेगा. हर मील में करीब 25 से 30 ग्राम प्रोटीन शामिल करना मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखता है और बार-बार लगने वाली भूख को कंट्रोल करता है. खास तौर पर अगर आपने खाली पेट वर्कआउट किया है तो एक्सरसाइज के 1-2 घंटे के अंदर प्रोटीन लेना रिकवरी के लिए अच्छा माना जाता है.

बढ़ती उम्र में टाइमिंग

युवाओं के मुकाबले बढ़ती उम्र के लोगों (खासकर 40 के बाद) के लिए प्रोटीन की टाइमिंग थोड़ा ज्यादा महत्व रखती है. उम्र बढ़ने के साथ मसल्स कमजोर होने लगते हैं जिससे बचने के लिए ब्रेकफास्ट और दोपहर के खाने में प्रोटीन की अच्छी मात्रा लेना फायदेमंद होता है. रात को सोने से पहले धीमी गति से पचने वाला प्रोटीन (जैसे दूध या पनीर) भी मसल्स रिकवरी में मदद कर सकता है.

प्रोटीन की मात्रा या समय?

एक्सपर्ट कहते हैं कि कुल मिलाकर बात यह है कि आपको ‘एनाबोलिक विंडो’ के पीछे भागने के बजाय अपनी डेली डाइट में प्रोटीन की कुल मात्रा पर ध्यान देना चाहिए. अपने वजन और एक्टिविटी लेवल के हिसाब से प्रोटीन तय करें और उसे टुकड़ों में लें. क्वालिटी के लिए लीन मीट, डेयरी उत्पाद, अंडे और दालों को प्राथमिकता दें.

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