राहुल गांधी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, सेना पर टिप्पणी का मामला तूल पकड़ा

ByCrank10

May 29, 2025


RAHUL GANDHI: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सेना पर कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में हाईकोर्ट से झटका मिला है. लखनऊ बेंच ने उनकी याचिका खारिज कर दी है. यह मामला भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा है, जिस पर स्थानीय अदालत ने समन जारी किया था.

RAHUL GANDHI: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भारतीय सेना पर कथित रूप से की गई टिप्पणी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने स्थानीय अदालत से जारी समन को चुनौती दी थी. न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया और कहा कि विस्तृत आदेश सोमवार को जारी किया जाएगा.

क्या है मामला?

राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ की एक स्थानीय अदालत में एक परिवाद दाखिल किया गया था. आरोप है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने सेना को लेकर एक कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था, “चीनी सैनिकों की ओर से भारतीय सैनिकों की पिटाई के बारे में कोई कुछ नहीं पूछता?” इस बयान को सेना की गरिमा के खिलाफ माना गया और इसके विरोध में मामला दर्ज किया गया.

किसने किया था परिवाद दर्ज?

यह परिवाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव द्वारा दर्ज कराया गया था. उनका आरोप है कि राहुल गांधी की इस टिप्पणी से न सिर्फ सेना का अपमान हुआ है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं.

स्थानीय अदालत ने जारी किया समन

परिवाद पर सुनवाई करते हुए लखनऊ की स्थानीय अदालत ने राहुल गांधी को बतौर आरोपी तलब किया और उनके खिलाफ समन जारी किया था. इसके बाद राहुल गांधी ने इस समन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी.

हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

गुरुवार को इस याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में विस्तृत आदेश सोमवार को सार्वजनिक किया जाएगा.

आगे की राह

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश पर टिकी हैं, जो सोमवार को जारी किया जाएगा. वहीं, कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. यह मामला राजनीतिक रूप से भी खासा अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा हुआ है.



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