सबसे ज्यादा चोट तब लगती है जब आप ऊंचाई से ग‍िरते हैं. इसका दर्द आप IAS-IPS की तैयारी में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी फेल होने वाले अभ्यर्थी से भी पूछ सकते हैं. ये एक ऐसा मुकाम होता है जहां कोई व्यक्त‍ि पूरी तरह टूट भी सकता है. लेकिन निर्मल पवार एक ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनके जीवन में बहुत सी फेलियर रहीं लेकिन उन्होंने खुद को टूटने से बचाया. भले ही आज उनके सामने पहाड़ जैसी चुनौतियां हों, लेकिन उनके भीतर की उम्मीद आज भी जीत के लिए बेताब है.

सैनिक स्कूल से यूपीएससी का सपना
महाराष्ट्र के सैनिक स्कूल सातारा से पढ़ाई करने वाले न‍िर्मल का शुरुआती सपना सेना में जाने का था. छठी से बारहवीं तक बोर्डिंग स्कूल की अनुशासित जिंदगी ने उनमें सेवा भावना पैदा की. आगे उन्होंने नासिक के केके वाग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीन‍ियर‍िंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इंजीनियरिंग के बाद करियर के कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने UPSC को चुना. वजह साफ थी, समाज में बड़ा बदलाव लाने की इच्छा.

7 साल और 6 असफलताएं: संघर्ष की टाइमलाइन
साल 2018 में वह दिल्ली पहुंचे. मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर की लाइब्रेरी, नोट्स और टेस्ट सीरीज के बीच तैयारी शुरू हुई. लेकिन UPSC की असली चुनौती यहीं से शुरू हुई:

2018-19: प्रीलिम्स में असफलता
2020: मेन्स तक पहुंचे लेकिन बात नहीं बनी.
2021-22: प्रीलिम्स और मेन्स का उतार-चढ़ाव जारी रहा.
2023: वो साल जब मंजिल करीब थी. प्रीलिम्स और मेन्स क्लियर कर इंटरव्यू तक पहुंचे. 176 अंक मिले, लेकिन मेरिट में महज 21 अंकों से सपना छूट गया.
2024: एक बार फिर मेन्स की दहलीज पर आकर रुक गए.

जब वक्त रुक गया और एंजायटी बढ़ी
निर्मल कहते हैं, ‘UPSC की तैयारी जीवनशैली बन जाती है. हर साल एक ही परीक्षा होती है. आसपास के दोस्त आगे बढ़ते जाते हैं, किसी की नौकरी, किसी की शादी. आपको लगता है कि समय कहीं रुक गया है.’ सात साल के इस लंबे सफर ने उन्हें आर्थिक दबाव और सामाजिक सवालों के साथ-साथ एंजायटी के दौर में भी डाला. रात में नींद टूटना और घबराहट तैयारी का हिस्सा बन गए, लेकिन परिवार का साथ ढाल बनकर खड़ा रहा.

नया मोड़: स्टार्टअप के साथ तैयारी का बैलेंस
7 साल के गैप के बाद करियर को नई दिशा देना आसान नहीं था. निर्मल का मानना है कि ज्ञान बहुत है, लेकिन इंडस्ट्री स्किल्स मांगती है. इसी सोच के साथ उन्होंने हाल ही में सोलर एनर्जी सेक्टर में अपना बिजनेस शुरू किया है. सोलर इन्वर्टर और बैटरी का यह स्टार्टअप अभी शुरुआती चरण में है. लेकिन यह स्टार्टअप उनके सपने का अंत नहीं, बल्कि उसे सहारा देने वाला आधार (प्लान-बी) है.

रुकावटें आई हैं, सफर खत्म नहीं हुआ!
क्या निर्मल ने हार मान ली? इसका जवाब उनकी आंखों की चमक में है. निर्मल कहते हैं, ‘सफर अभी खत्म नहीं हुआ है.’ वे अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आर्थिक स्थिरता हासिल कर रहे हैं, ताकि अगले प्रयास के लिए खुद को मानसिक रूप से और मजबूत कर सकें.

वे कहते हैं, ‘पछतावा नहीं है, क्योंकि फैसला मेरा था. स्टार्टअप मुझे आत्मनिर्भर बना रहा है, लेकिन लक्ष्य आज भी वही है.’ उनकी यह कहानी सफलता या असफलता की नहीं, बल्कि उस जिद की है जो सात साल की ठोकरों के बाद भी फिर से खड़े होकर लड़ने का हौसला रखती है. UPSC शायद कुछ हजार लोगों को अफसर बनाती है, लेकिन निर्मल जैसे लाखों युवाओं को वो धैर्य और अनुशासन दे जाती है, जो जीवन की किसी भी परीक्षा में हारने नहीं देता.

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