देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों (IITs) में बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं के बीच IIT मंडी ने एक अनोखा और सफल रास्ता खोज निकाला है. हिमालय की गोद में बसा यह संस्थान अब अपने छात्रों को स्ट्रेस से बचाने के लिए ‘प्राचीन भारतीय ज्ञान’ (Indian Knowledge Systems- IKS) का सहारा ले रहा है. खास बात यह है कि पिछले 5 वर्षों में यहाँ सुसाइड की केवल एक घटना रिपोर्ट हुई है, जो अन्य IITs की तुलना में काफी कम है.

म्यूजिक और माइंड: कैसे काम करते हैं ‘राग’?
आईआईटी मंडी ने IIT कानपुर के साथ मिलकर एक वैज्ञानिक स्टडी की है. इसमें पाया गया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत का दिमाग पर गहरा और सकारात्मक असर पड़ता है.

राग दरबारी: यह राग मन को शांत करने और एकाग्रता (Focus) बढ़ाने में मददगार पाया गया.
राग जोगिया: यह भावनात्मक संतुलन और आत्म-चिंतन की शक्ति को बढ़ाता है.
वैज्ञानिक प्रमाण: EEG स्टडी में 19 से 29 वर्ष के युवाओं के ब्रेन सिग्नल में स्पष्ट सुधार देखा गया, जिससे उनकी याददाश्त और अटेंशन में वृद्धि हुई.

गुरुकुल परंपरा की वापसी: योग और मंत्रोच्चार
IIT मंडी के डायरेक्टर प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के अनुसार, संस्थान ने योग, ध्यान (Meditation) और मंत्रोच्चार को छात्रों की दिनचर्या का हिस्सा बनाया है.

Pause in Routine: बीटेक छात्र अयन गर्ग बताते हैं कि असाइनमेंट और लैब की भागदौड़ के बीच ये 1 घंटे के सेशन दिमाग को ‘रीसेट’ कर देते हैं.

सिर्फ दर्शन नहीं, विज्ञान: यहां प्राचीन परंपराओं को केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पढ़ाया और अपनाया जा रहा है.

क्यों पड़ी इसकी जरूरत? (देश के हालात)
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में भारत में 13,089 छात्रों ने आत्महत्या की. IIT जैसे संस्थानों में पिछले 5 साल में 65 छात्रों ने अपनी जान दी. इस संकट को देखते हुए IIT मंडी का ‘देसी मॉडल’ अब पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन गया है.

IIT मंडी के मॉडल की 3 मुख्य बातें
साउंड थेरेपी: शास्त्रीय संगीत और प्राकृतिक ध्वनियों का इस्तेमाल.
मेंटल स्क्रीनिंग: छात्रों की मानसिक स्थिति की नियमित जांच और काउंसलिंग.
कनेक्शन: गुरु-शिष्य परंपरा की तर्ज पर छात्रों और शिक्षकों के बीच बेहतर संवाद.

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