आतंकी या बेकसूर को मारा? जम्मू-कश्मीर में गांदरबल एनकाउंटर पर उठे सवाल, LG का आदेश- सात दिन में जांच हो – ganderbal encounter rashid mughal death probe lg manoj sinha magisterial inquiry controversy NTC agkp

ByCrank10

April 3, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के अरहामा इलाके में बुधवार की सुबह सेना ने एक ऑपरेशन चलाया. सेना का कहना था कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि इस इलाके में एक लोकल आतंकी छुपा हुआ है. ऑपरेशन के बाद सेना ने ऐलान किया कि एक आतंकी मारा गया.

लेकिन जैसे ही मरने वाले का नाम और पहचान सामने आया, मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी मचा दी. प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने इस एनकाउंटर यानि कि सेना के ऑपरेशन पर सवाल उठाए. मुख्यमंत्री ने जांच की मांग की थी और पीडीपी चीफ ने इसका समर्थन किया था.

अब एलजी मनोज सिन्हा ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

कौन था रशीद अहमद मुगल?

रशीद अहमद मुगल, उम्र 29 साल. गांदरबल के लार गांव का रहने वाला था. घर में एक आम जिंदगी जीने वाला नौजवान. BA तक पढ़ाई की थी. अपने गांव में ही कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करता था और घर-परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी भी करता था. पड़ोसी उसे एक शांत और मेहनती लड़के के तौर पर जानते थे.

परिवार का दावा

रशीद के परिवार ने सेना के दावे को पूरी तरह गलत बताया. परिवार का कहना है कि रशीद का आतंकवाद से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं था. वो एक आम मजदूर था जो रोज की तरह अपने काम पर निकला था. परिवार ने आरोप लगाया कि उसे जानबूझकर फंसाया गया और एक बेगुनाह की जान ले ली गई.

गांदरबल में एक तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाकर्मी पहरा देते हुए (Photo: PTI)

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मामला बड़ा कैसे हुआ?

परिवार की बात सिर्फ गांव तक नहीं रही. PDP की नेता मेहबूबा मुफ्ती ने इस एनकाउंटर पर खुलकर सवाल उठाए. J&K के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए. दो बड़े नेताओं के बोलने के बाद इस मामले को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया.

जांच के आदेश

LG मनोज सिन्हा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए. जांच टीम को 7 दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट सौंपनी होगी.

अब स्थानीय लोगों के बीच सवाल यही सवाल पर चर्चा हो रही है कि क्या सेना को मिली जानकारी सही थी? या एक मेहनतकश नौजवान गलती का शिकार हो गया? 7 दिन बाद जो रिपोर्ट आएगी, वो सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए अहम होगी.

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