तेलंगाना के हनमकोंडा जिले से सामने आए एक दिल दहला देने वाले ट्रिपल मर्डर केस ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. इस मामले में एक शख्स पर अपनी गर्भवती पत्नी और दो मासूम बेटियों की हत्या का इल्जाम है. शुरुआती जांच में जो वजह सामने आई है, उसने समाज को शर्मसार कर दिया है. पुलिस इस हत्याकांड में गर्ल चाइल्ड एंगल की गहराई से जांच कर रही है. बेटे की चाह में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिए जाने की आशंका जताई जा रही है.

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक आरोपी अपनी पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर बेहद जुनूनी था. उसे शक था कि इस बार भी उसकी पत्नी एक बेटी को जन्म दे सकती है. इसी डर और मानसिकता ने उसे इतना निर्दयी बना दिया कि उसने अपनी ही पत्नी और दोनों बेटियों की हत्या की साजिश रच डाली. यह मामला न सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि समाज में मौजूद बेटा-बेटी के भेदभाव की भी भयावह तस्वीर पेश करता है.

इनावोले पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर पी. श्रीनिवास के मुताबिक शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी अपनी पत्नी पर गर्भपात कराने का दबाव डाल चुका था. उसे शक होता था कि गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़की है, इसलिए वह बार-बार अबॉर्शन के लिए मजबूर करता था. लेकिन पत्नी ने इस बार गर्भ गिराने से इनकार कर दिया, जिससे दोनों के बीच विवाद बढ़ता चला गया.

पुलिस को शक है कि इसी विवाद ने इस खौफनाक हत्याकांड की नींव रखी. आरोपी कथित तौर पर एक साजिश के तहत अपनी पत्नी और दोनों बेटियों को घुमाने के बहाने स्विमिंग पूल पर ले गया. वहां उसने तीनों को पानी में डुबोकर मार डाला. यही नहीं, शातिर आरोपी ने इस पूरी घटना को हादसा दिखाने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस की जांच पड़ताल में मामला खुलता चला गया.

इस मामले में पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया है और आरोपी से पूछताछ जारी है. साथ ही जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इस मामले में अवैध लिंग जांच (सेक्स डिटरमिनेशन) और जबरन गर्भपात से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हुआ है. अगर ऐसा पाया जाता है तो आरोपी पर और भी सख्त धाराएं लगाई जा सकती हैं.

यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आज भी कुछ लोग बेटे की चाह में किस हद तक गिर सकते हैं. सरकार और समाज द्वारा लगातार जागरूकता के बावजूद बेटियों के प्रति भेदभाव खत्म नहीं हो पाया है. हनमकोंडा का यह मामला एक बार फिर से सोचने पर मजबूर करता है कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है.

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