इस अरब मुल्क में तबाही का दायरा बढ़ा… तेल-बिजली-पानी से लेकर सरकारी बिल्डिंग तक पर हमले – Kuwait Oil Site Power Plant Government Building Attack Iran War Latest News mnrd


मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब और खतरनाक मोड़ लेती दिख रही है. कुवैत में एक के बाद एक ड्रोन हमलों ने हालात को गंभीर बना दिया है. ताजा हमलों में तेल सेक्टर, पावर प्लांट और सरकारी इमारतों तक को निशाना बनाया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है.

रविवार सुबह सबसे बड़ा हमला कुवैत के शुवैख इलाके में हुआ, जहां कुवैत पेट्रोलियम कोऑपरेशन के ऑयल कॉम्प्लेक्स में आग लग गई. इस कॉम्प्लेक्स में कुवैत का तेल मंत्रालय और कंपनी का मुख्यालय भी स्थित है. ड्रोन हमले के बाद पूरे परिसर को तुरंत खाली करा लिया गया. राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई.

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इसके अलावा, एक और ड्रोन हमले में सरकारी मंत्रालयों के ऑफिस कॉम्प्लेक्स को भी निशाना बनाया गया. इस हमले में इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के घायल होने की खबर नहीं है. ऊर्जा सेक्टर पर हमले का असर और भी गंभीर रहा.

पॉवर-डीसैलिनेशन प्लांट्स पर भी हमले

कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय के मुताबिक, दो बड़े पावर और वॉटर डीसैलिनेशन प्लांट्स को निशाना बनाया गया. इन हमलों के बाद दो बिजली उत्पादन यूनिट्स को बंद करना पड़ा, जिससे सप्लाई पर असर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार ने इमरजेंसी प्लान लागू कर दिए हैं ताकि आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो.

इसी बीच खाड़ी के एक और देश बहरीन में भी हमला हुआ. वहां एक स्टोरेज फैसिलिटी में आग लग गई, जिसे बाद में काबू कर लिया गया. इस हमले में भी कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन नुकसान का आकलन किया जा रहा है.

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कुवैत के कई तेल रिफाइनरी पर हमले

कुवैत पहले भी इस जंग का असर झेल चुका है. यहां की बड़ी रिफाइनरी मीना अल-अहमदी रिफाइनरी और मीना अब्दुल्लाह रिफाइनरी पर पहले भी ड्रोन हमले हो चुके हैं. कई बार ये हमले एक साथ कई जगहों पर किए गए, जिससे ऑपरेशनल यूनिट्स को भारी नुकसान हुआ. इन लगातार हमलों का असर सिर्फ कुवैत तक सीमित नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खाड़ी के ऊर्जा ढांचे पर इसी तरह हमले जारी रहे, तो वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ेगा.

कुवैत, जो OPEC के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है, पहले रोजाना करीब 2.6 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता था. लेकिन जंग और होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं की वजह से अब उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि, इस हमले को लेकर ईरान की तरफ से खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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