एक पायलट को बचाने के लिए भेजे 155 एयरक्राफ्ट, ट्रंप ने बताई ईरान से हुए ऐतिहासिक रेस्क्यू की कहानी – US President Donald Trump Press Conference on war pilot rescue mission Iran Strait of Hormuz NTC AGKP

ByCrank10

April 6, 2026


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आज वे एक ऐसे मिशन की सफलता का जश्न मनाने के लिए मौजूद हैं, जो सैन्य इतिहास के सबसे बड़े, जटिल और जोखिम भरे कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक था. उन्होंने बताया कि आम तौर पर युद्ध के दौरान जब किसी विमान को दुश्मन इलाके में गिरा दिया जाता है, तो उसे बचाने के लिए इतने बड़े स्तर का ऑपरेशन करना बहुत मुश्किल होता है. कई बार एक या दो लोगों को बचाने के लिए सैकड़ों सैनिकों को जोखिम में डालना पड़ता है, इसलिए ऐसे मिशन अक्सर किए ही नहीं जाते.

उन्होंने कहा कि इस मामले में भी बड़ा खतरा था, लेकिन इसके बावजूद मिशन को अंजाम दिया गया और इसमें टीम की क्षमता के साथ-साथ थोड़ी किस्मत ने भी साथ दिया.

ईरान में दुश्मन इलाके के अंदर गिरा F-15 विमान

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि गुरुवार देर रात एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट ईरान के अंदर दुश्मन इलाके में गिर गया था. यह विमान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत मिशन पर था. उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में अमेरिका बेहद मजबूत स्थिति में है और प्रदर्शन ऐसा है जैसा पहले कभी नहीं देखा गया.

पूरे देश को एक रात में खत्म करने की चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि वह पूरे देश को एक रात में खत्म कर सकता है और वह रात कभी भी आ सकती है, यहां तक कि अगली रात भी. उन्होंने इस मिशन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह ऑपरेशन सैन्य इतिहास में दर्ज होगा और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका बेहद अहम रही.

जो भी जरूरी हो, करने का आदेश

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना को आदेश दिया कि अपने सैनिकों को वापस लाने के लिए जो भी जरूरी हो, वह किया जाए. उन्होंने माना कि यह बेहद जोखिम भरा फैसला था, क्योंकि इससे 1-2 की जगह 100 सैनिकों की जान भी जा सकती थी. लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना का सिद्धांत है, ‘हम अपने किसी भी नागरिक को पीछे नहीं छोड़ते’.

21 सैन्य विमान दुश्मन के इलाके में भेजे गए

उन्होंने बताया कि कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिकी सेना ने 21 सैन्य विमान दुश्मन के एयरस्पेस में भेज दिए. कई विमान बहुत कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे और उन पर गोलियां चलाई जा रही थीं. उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन दिन के उजाले में करीब 7 घंटे तक चला और इस दौरान भारी दुश्मन फायरिंग का सामना करना पड़ा.

पहले पायलट को हेलिकॉप्टर से निकाला गया

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि पहली रेस्क्यू टीम ने F-15 के पायलट को खोज लिया और उसे HH-60 जॉली ग्रीन हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया. उन्होंने कहा कि इस दौरान सैनिकों को बेहद करीब से फायरिंग का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर भी कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.

दूसरा क्रू मेंबर घायल, पहाड़ों में फंसा

उन्होंने बताया कि दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम्स ऑफिसर था, पायलट से काफी दूर जाकर गिरा. तेज रफ्तार की वजह से कुछ सेकंड का फर्क भी कई किलोमीटर की दूरी बना देता है. वह गंभीर रूप से घायल था और ऐसे इलाके में फंसा था जहां ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड, स्थानीय आतंकी संगठन और अन्य खतरे मौजूद थे.

खून बहता रहा, फिर भी बचने की कोशिश जारी

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि घायल अधिकारी ने अपनी ट्रेनिंग के अनुसार खुद को बचाने की कोशिश की. वह पहाड़ी इलाके में ऊपर की तरफ चढ़ा ताकि दुश्मनों से बच सके. उन्होंने बताया कि वह बुरी तरह घायल होने के बावजूद चट्टानों पर चढ़ता रहा, खुद अपने जख्मों का इलाज किया और अपने लोकेशन की जानकारी अमेरिकी सेना तक पहुंचाई.

उसके पास एक खास लोकेशन ट्रांसमीटर डिवाइस था, जिसकी मदद से उसने संपर्क बनाए रखा और अंततः उसे भी बचाने में सफलता मिली.

दूसरे रेस्क्यू ऑपरेशन में दिखी बड़ी सैन्य ताकत

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इसके बाद तुरंत एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसमें पहाड़ी इलाके में फंसे उस अधिकारी को निकालने के लिए भारी सैन्य ताकत लगाई गई. उन्होंने बताया कि दूसरे रेस्क्यू मिशन में कुल 155 एयरक्राफ्ट शामिल थे, जिनमें 4 बॉम्बर, 64 फाइटर जेट, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 रेस्क्यू एयरक्राफ्ट थे.

दुश्मन को भ्रम में डालने की रणनीति

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस मिशन में खास रणनीति अपनाई गई. दुश्मन को भ्रमित करने के लिए कई जगहों पर अलग-अलग टीमों को एक्टिव दिखाया गया, ताकि उन्हें असली लोकेशन का पता न चल सके. उन्होंने बताया कि दुश्मन को लगा कि पायलट अलग-अलग जगहों पर हो सकता है, जिससे वे भ्रम में पड़ गए और अमेरिकी सेना को असली जगह पर ऑपरेशन करने का मौका मिल गया.

भारी गोलीबारी के बीच सफल रेस्क्यू

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने बेहद सटीक और तेज कार्रवाई करते हुए सही लोकेशन पर हमला किया, दुश्मन से मुकाबला किया, फंसे हुए अधिकारी को सुरक्षित निकाला और बिना किसी नुकसान के वापस लौट आई. उन्होंने बताया कि वह अधिकारी करीब 48 घंटे तक दुश्मन इलाके में छिपकर बचता रहा, जो बेहद कठिन स्थिति थी, खासकर जब वह घायल भी था.

जरूरत पड़ने पर उपकरण तक नष्ट किए

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान कुछ बड़े विमानों को वापस ले जाना संभव नहीं था, क्योंकि वे भारी थे और जमीन की स्थिति खराब थी. उन्होंने बताया कि ऐसे में सेना ने उन विमानों को वहीं नष्ट कर दिया, ताकि दुश्मन को अमेरिकी तकनीक और उपकरणों तक पहुंच न मिल सके.

तेज और हल्के विमानों से सुरक्षित निकासी

उन्होंने कहा कि इसके बाद हल्के और तेज विमानों को बुलाया गया, जिन्होंने कम समय में सभी सैनिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लिया.

सैनिकों की क्षमता और योजना की सराहना

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे ऑपरेशन को असाधारण बताते हुए कहा कि इसमें शामिल सैनिकों ने अद्भुत साहस और कौशल दिखाया. उन्होंने कहा कि सेना ने हर परिस्थिति के लिए बैकअप प्लान तैयार रखा था और यही इस मिशन की सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी.

हम अपने लोगों को हर हाल में वापस लाते हैं

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना का सिद्धांत स्पष्ट है – अपने लोगों को हर हाल में सुरक्षित वापस लाना. उन्होंने सभी सैनिकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन इतिहास में दर्ज होगा और यह दिखाता है कि अमेरिका अपने सैनिकों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.

हजारों मिशन, लेकिन एक भी पायलट पीछे नहीं छोड़ा

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि पिछले 37 दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के ऊपर 10,000 से ज्यादा कॉम्बैट फ्लाइट्स और 13,000 से ज्यादा टारगेट पर स्ट्राइक की है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े ऑपरेशन के बावजूद यह पहला मौका था जब कोई अमेरिकी विमान दुश्मन की कार्रवाई में गिरा, लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि
दोनों क्रू मेंबर्स को सुरक्षित वापस लाया गया.

कठिन हालात में भी दिखी बेहतरीन योजना

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान जिस जगह से निकासी की गई, वह कोई रनवे नहीं बल्कि एक खेत था, जहां गीली रेत के कारण विमान का उड़ान भरना बेहद मुश्किल था. उन्होंने बताया कि इस स्थिति के लिए पहले से बैकअप प्लान तैयार रखा गया था और जैसे ही जरूरत पड़ी, हल्के और तेज विमान तुरंत वहां पहुंचे और सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया.

CIA और सेना की भूमिका अहम

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मिशन में CIA और सैन्य अधिकारियों की भूमिका की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि दुश्मन के इलाके में फंसे पायलट को ढूंढना ‘भूसे के ढेर में सुई खोजने’ जैसा था, लेकिन एजेंसियों ने मिलकर इसे संभव किया.

ऐसे ऑपरेशन इतिहास में दुर्लभ होते हैं

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन आमतौर पर नहीं किए जाते, क्योंकि जोखिम बहुत ज्यादा होता है और अक्सर ज्यादा नुकसान हो सकता है. लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका का सिद्धांत साफ है – किसी भी हालत में अपने सैनिकों को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा, और इस मिशन ने एक बार फिर इसे साबित किया.

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