लिवर को अंदर से सुखा रही है टाइप-2 डायबिटीज! डॉक्टरों ने बताया, कैसे करें बचाव – type 2 diabetes liver fibrosis cirrhosis risk hidden liver damage study health news tvism


डायबिटीज के मरीजों अक्सर सिर्फ अपना शुगर लेवल चेक करते हैं कि कहीं उनकी ब्लड शुगर ऊपर तो नहीं जा रहा. लेकिन अब उन्हें सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि डायबिटीज के मरीजों को सिर्फ शुगर लेवल चेक करना काफी नहीं है. एक नई रिसर्च के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज वाले कई लोगों के लिवर में भी समस्याएं दिख रही हैं. वडोदरा के एसएसजी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई इस स्टडी में पाया गया कि कई मरीजों को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उन्हें लिवर फाइब्रोसिस या लिवर सिरोसिस का भी जोखिम हो सकता है. डॉक्टर्स का कहना है कि ये समस्याएं भविष्य में लिवर फेल होने का भी कारण बन सकती हैं.

क्या कहती है स्टडी?

द लैंसेट रीजनल हेल्थ, साउथईस्ट एशिया (अप्रैल 2026) में पब्लिश स्टडी का कहना है कि 4 में से एक डायबिटीज मरीज को लिवर फाइब्रोसिस की गंभीर समस्या है, जबकि हर 20 मरीज में से एक को लिवर सिरोसिस हो सकता है वो भी बिना किसी लक्षण के.

वडोदरा के मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट द्वारा की गई इस स्टडी में टाइप-2 डायबिटीज के उन मरीजों को शामिल किया गया था जिनमें लिवर की बीमारी के कोई बाहरी लक्षण नहीं दिख रहा था. फाइब्रोस्कैन टेस्ट के जरिए जब इनकी जांच की गई तो नतीजे सामने आए. कई मरीजों के लिवर में फैट जमा तो था ही, साथ ही साथ कई मरीजों के टिश्यूज सख्त हो गए थे जिसे फाइब्रोसिस की कैटेगरी में रखा जाता है.

9000 मरीजों पर हुई जांच

यह रिसर्च किसी एक छोटे इलाके तक सीमित नहीं थी बल्कि इसमें देशभर के 27 हॉस्पिटल्स और क्लीनिकों में DiaFib-Liver Study के डेटा का एनालेसिस किया गया. इस स्टडी में मेदांता (गुरुग्राम), सर गंगा राम अस्पताल (दिल्ली), पीजीआईएमईआर (चंडीगढ़) और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (चेन्नई) जैसे ऑर्गनाइजेशंस शामिल थे.

रिसर्च के दौरान 9000 से अधिक टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के पिछले रिकॉर्ड्स और स्क्रीनिंग डेटा का एनालेसिस किया और पाया गया कि डायबिटीज के 26% मरीजों में फाइब्रोसिस के लक्षण थे, 14% में यह स्थिति काफी गंभीर (एडवांस्ड फाइब्रोसिस) थी, जबकि 5% मरीज ‘सिरोसिस’ की कगार पर पहुंच चुके थे.

बिना फैटी लिवर वालों को भी खतरा

रिसर्च का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि लिवर डैमेज केवल उन लोगों तक सीमित नहीं था जिन्हें फैटी लिवर की शिकायत थी. आंकड़ों के मुताबिक, जिन मरीजों के लिवर में फैट का पता नहीं चला था या उन्हें लिवर संबंधी कोई भी शिकायत नहीं थी, ऐसे लगभग 13 प्रतिसथ लोगों के लिवर में फाइब्रोसिस पाया गया. इसमें 4% मरीज ऐसे थे जो सिरोसिस के खतरे वाले दायरे में थे.

क्या दिखते हैं लक्षण

रिसर्च का कहना है कि डायबिटीज के कारण लिवर में सूजन आने लगती है जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहते हैं. लेकिन इसका पता सिर्फ रूटीन ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड से नहीं चल पाता. जब तक लिवर में दर्द या पीलिया जैसे लक्षण सामने आते हैं, तब तक लिवर काफी हद तक खराब हो चुका होता है. यही कारण है कि इसे छिपा हुआ खतरा माना जा रहा है.

डॉक्टरों की सलाह

स्टडी वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों को केवल शुगर लेवल पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए. हर डायबिटीज मरीज को साल में कम से कम एक बार लिवर की जांच करानी चाहिए. इसके अलावा सही डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और वजन कंट्रोल में रखकर इन खतरों को कम किया जा सकता है.

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