अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर जितेश पटेल और उनकी अटलांटा स्थित यूरोलॉजी संस्था ‘एडवांस्ड यूरोलॉजी’ पर आरोप है कि उन्होंने मरीजों पर अनावश्यक मेडिकल प्रक्रियाएं कर स्वास्थ्य धोखाधड़ी की. इस मामले को सुलझाने के लिए उन्होंने अब 14 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है.

अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के अनुसार, अटलांटा स्थित ‘एडवांस्ड यूरोलॉजी’ और डॉ. पटेल यह राशि फ़ॉल्स क्लेम्स एक्ट और जॉर्जिया फ़ॉल्स मेडिकेड क्लेम्स एक्ट के उल्लंघन से जुड़े दावों को निपटाने के लिए देंगे.

आरोप है कि इस संस्था ने मेडिकेयर, मेडिकेड, ट्राईकेयर और अन्य सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों से उन यूरोलॉजिकल और डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं के लिए बिल वसूला, जो या तो की ही नहीं गईं या फिर चिकित्सकीय रूप से आवश्यक नहीं थीं.

व्हिसलब्लोअर्स में एडवांस्ड यूरोलॉजी की पूर्व कर्मचारी Lorraine Perumal-Szramel और इस सुविधा के पूर्व चिकित्सक डॉ. हिमांशु अग्रवाल शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि एडवांस्ड यूरोलॉजी का पूरा ढांचा पटेल और अन्य लोगों के लिए अधिकतम मुनाफा कमाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था.

कई आरोप शामिल:

  • मरीजों में स्थायी सैक्रल नर्व स्टिम्युलेटर डिवाइस बिना यह सुनिश्चित किए ही प्रत्यारोपित करना कि उससे उन्हें वास्तव में लाभ होगा या नहीं.
  • बड़ी संख्या में अनावश्यक सिस्टोस्कोपी और रेट्रोग्रेड पायलोग्राम प्रक्रियाएं करना, जिनमें मरीजों को एनेस्थीसिया देकर मूत्रमार्ग के जरिए ब्लैडर तक स्कोप डाला जाता है.
  • लगभग हर नए मरीज पर इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) टेस्ट करना, जबकि सामान्य यूरोलॉजी प्रैक्टिस में ऐसे टेस्ट बहुत कम किए जाते हैं.
  • हजारों की संख्या में अनावश्यक अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाना, जिनमें डुप्लेक्स और रेट्रोपेरिटोनियल अल्ट्रासाउंड शामिल हैं.
  • डायरेक्ट विज़ुअल इंटरनल यूरेथ्रोटोमी (DVIU) जैसी जटिल प्रक्रिया के नाम पर बिलिंग करना, जिसमें स्कोप और चाकू की मदद से यूरेथ्रा के अंदर ऊतक को काटा जाता है, जबकि आरोप है कि वास्तव में सिर्फ साधारण डाइलेशन किया जाता था और ज्यादा पैसे वसूले जाते थे.

FOX 5 Atlanta की रिपोर्ट के मुताबिक, पटेल और उनके क्लिनिक ने लगभग हर नए मरीज पर आक्रामक जांचें कीं और ऐसी सर्जरी के लिए भी बिल वसूला जो वास्तव में की ही नहीं गई थीं.

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