यूएस-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण पश्चिम एशिया में जो तनाव बना हुआ है, इसके लिए आज का दिन महत्वपूर्ण होने वाला है. ये जंग अब उस स्थिति में पहुंच चुकी है कि ईरान और अमेरिका दोनों के लिए ‘यही रात अंतिम यही रात भारी’ वाली स्थिति है.

होर्मुज खुलवाने के लिए ट्रंप की ओर से दी गई 48 घंटे वाले धमकी अब अपने आखिरी दौर में हैं और इसमें 12 घंटे से भी कम ही समय बचा है, तो क्या ये समय खत्म होते ही आज की रात कयामत की रात होगी?

4 अप्रैल को दी थी 48 घंटे वाली धमकी
ट्रंप ने 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका ‘भारी तबाही’ मचाएगा. ट्रंप इससे पहले ईरान को स्टोन एज में पहुंचाने की धमकी दे चुके हैं. 4 अप्रैल को जारी 48 घंटे का “फाइनल अल्टीमेटम” इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है.

ईरान के इन अहम स्थानों पर खतरा!
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा. यानी ट्रंप ईरान में बड़ी तबाही मचाने की बात कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो ईरान के एनर्जी प्लांट्स, पावर प्लांट्स, बड़े पुल, मिलिट्री ठिकाने, एयरपोर्ट, प्रमुख सड़कें और राजधानी समेत बड़े शहरों के प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया जा सकता है.

ईरान

ईरान के ऊर्जा ठिकानों को तहस-नहस करने की प्लांनिंग?
इस लिहाज से देखें तो ईरान में सोलर, हाइड्रो (जल), वायु, कोयला और न्यूक्लियर प्लांट हैं. इनमें गैस पर आधारित पॉवर प्लांट्स अधिक हैं. OpenInfraMap के डेटा की मानें तो ईरान में करीब 110 गैस प्लांट हैं जिनमें से कुछ हाइब्रिड हैं. बुशहर परमाणु पॉवर प्लांट, बुशेहर काउंटी, (ईरान) में है जो कि न्यूक्लियर साइट के तौर पर देखी जाती है.

यह 1,000 मेगावाट (MW) की क्षमता वाला एक परमाणु ऊर्जा केंद्र है. इसका निर्माण 1970 के दशक में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन 1979 की क्रांति के बाद, इसे रूस की रोसाटॉम (Atomstroyexport) ने पूरा किया.

ईरान में बड़े पावर प्लांट्स

दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट- यह राजधानी तेहरान से लगभग 70 km दक्षिण-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,868 MW है.

शाहिद सलीमी- यह माजंदरान प्रांत में है कैस्पियन सागर के पास स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,215 MW है.

शाहिद रजाई- यह तेहरान शहर से लगभग 110 km उत्तर-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,043 MW है.

इसके अलावा और भी यूनिट्स हैं जो ईरान की ऊर्जा का प्रमुख सोर्स हैं

इनमें जहरोम पॉवर प्लांट, खानूज कंबांइड साइकिल पॉवर प्लांट, गिलान पॉवर प्लांट भी प्रमुख है.

ईरान की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 90 गीगावाट

ईरान अपनी ज्यादातर बिजली जीवाश्म ईंधनों से बनाता है. 2023 में ईरान ने न्यूक्लियर एनर्जी से 5,740 GWh बिजली बनाई.  थर्मल सेक्टर में रामिन अहवाज़ थर्मल पावर प्लांट (करीब 1900 मेगावाट) और दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट (लगभग 2800–3000 मेगावाट) सबसे बड़े संयंत्रों में शामिल हैं. जहरोम पावर प्लांट (करीब 1400 मेगावाट) और गनावेह पावर प्लांट (लगभग 484 मेगावाट) भी गैस बेस्ड प्रमुख इकाइयां हैं.

जलविद्युत क्षेत्र में करुन-3 हाइड्रोपावर प्लांट, मस्जिद-ए-सुलेमान हाइड्रोपावर प्लांट और शहीद अब्बासपुर हाइड्रोपावर प्लांट जैसे बड़े बांध आधारित संयंत्र शामिल हैं, जिनकी क्षमता लगभग 2000 मेगावाट के आसपास है. इसके अलावा केर्मान पावर प्लांट और शाहिद राजाई पावर प्लांट जैसे थर्मल संयंत्र भी सैकड़ों मेगावाट क्षमता के साथ नेशनल ग्रिड को मजबूती देते हैं.

कुल मिलाकर ईरान की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 90 गीगावाट के आसपास है, जिसमें गैस आधारित संयंत्रों का दबदबा है, जबकि जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा सीमित लेकिन रणनीतिक भूमिका निभाते हैं.

ईरान के पुलों को भी बनाया जा सकता है निशाना
US और इज़रायली सेनाओं ने हाल ही में अल्बोर्ज़ प्रांत के करज के B1 पुल पर दो हमले किए. इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई और पुल पूरी तरह से तबाह हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि हमलों के बाद पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया. करीब एक हजार मीटर लंबा B1 पुल, ईरान के अहम मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता रहा है.

ईरान

ट्रंप की धमकी सच साबित हो गई तो ईरान के कुछ और महत्वपूर्ण पुलों पर कयामत गिर सकती है. ईरान में कई बड़े और ऐतिहासिक ब्रिज हैं, जो न सिर्फ शहरों के बीच में कनेक्टिविटी बढ़ाते हैं, बल्कि देश की विरासत भी हैं.  करुण नदी पर बना आर्च ब्रिज ईरान का खास पुल है. वहीं इस्फ़हान में जायंडेह नदी पर बनाऐतिहासिक पुल भी निशाने पर हो सकता है जिसे 1650 के आसपास बनाया गया था.

ईरान के मिलिट्री ठिकाने भी बन सकते हैं निशाना?
ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों में बंदर अब्बास नेवल बेस शामिल है, जो फारस की खाड़ी में उसकी नौसेना की मुख्य गतिविधियों का केंद्र है. इसके अलावा हमदान एयरबेस, शाहरोखी एयरबेस वायुसेना के लिए बहुत अहमा ठिकाना है.

ईरान की सबसे खास सैन्य ताकत उसके भूमिगत ‘मिसाइल सिटी’ नेटवर्क में है. ये गुप्त ठिकाने देश के कई हिस्सों में फैले हुए हैं, जिनमें कर्मानशाह, कोम और खुरासान जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इन ठिकानों को पहाड़ों के अंदर और जमीन के सैकड़ों मीटर नीचे बनाया गया है, जहां से बैलिस्टिक मिसाइलों को सुरक्षित रूप से स्टोर और लॉन्च किया जा सकता है.

अमेरिका ईरान इन अहम ठिकानों को निशाने बनाने की प्लानिंग कर सकता है.

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