अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब संभावित बड़े युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर दी गई समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनियों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है. ऐसे में ईरान ने न केवल सैन्य बल्कि सामाजिक स्तर पर भी व्यापक तैयारी शुरू कर दी है, जो अभूतपूर्व मानी जा रही है.

ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, देश में अब तक करीब 1.4 करोड़ लोग संभावित युद्ध के लिए वॉलंटियर्स के रूप में सामने आए हैं. यह आंकड़ा महज पांच दिनों में दोगुना हो गया है. 2 अप्रैल को ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ ने बताया था कि लगभग 70 लाख लोगों ने खुद को युद्ध के लिए तैयार बताया था. ईरान की कुल आबादी करीब 9 करोड़ है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का सामने आना सरकार के लिए एक बड़ी ताकत के रूप में देखा जा रहा है. सरकार ने मोबाइल मैसेज और सरकारी अभियानों के जरिए लोगों से देश की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है. इसके अलावा, रिटायर्ड सैनिकों को भी दोबारा सेवा में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

बच्चों की भर्ती पर सवाल
हालांकि, इस तैयारी का सबसे विवादास्पद पहलू बच्चों की भर्ती को लेकर सामने आया है. ईरान की अर्धसैनिक ‘बसीज’ फोर्स, जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के तहत काम करती है, अब 12 साल तक के बच्चों को भी अपने साथ जोड़ रही है. इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया आई है. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे गंभीर उल्लंघन बताते हुए युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ नाबालिगों को हथियार भी दिए जा रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है.

ईरान के अधिकारी रहीम नदाली के मुताबिक ‘फॉर ईरान’ नामक अभियान के तहत युवाओं को गश्त, चेकपोस्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे कामों में लगाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा खुद आगे आ रहे हैं, जिसके चलते न्यूनतम आयु सीमा को घटाकर 12 वर्ष करना पड़ा. वहीं एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल हुसैन येक्ता ने सार्वजनिक रूप से माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों को चेकपोस्ट पर तैनाती के लिए भेजें, ताकि वे ‘असल मर्द’ बन सकें. इस बयान ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है.

ईरान अपने नागरिकों को मानव ढाल के तौर पर सामने ला रहा
इसी बीच, ईरान सरकार ने नागरिकों को युद्ध की स्थिति में ‘मानव ढाल’ के रूप में इस्तेमाल करने की योजना भी बनाई है. सरकार ने 7 अप्रैल को देशभर में पावर प्लांट्स और अहम सार्वजनिक ढांचे के आसपास मानव श्रृंखला बनाने की अपील की है. ईरान के उप युवा एवं खेल मंत्री अलीरेजा रहीमी ने सोशल मीडिया पर लोगों से एकजुट होकर इन ठिकानों की रक्षा करने की बात कही. इस अभियान को ‘ईरान यूथ ह्यूमन चेन फॉर ए ब्राइट फ्यूचर’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि सार्वजनिक ढांचे पर हमला ‘युद्ध अपराध’ है.

डोनाल्ड ट्रंप की धमकी
दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से लगातार सख्त बयान सामने आ रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को उनकी तय समयसीमा तक पूरी तरह चालू नहीं किया गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों पर बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आने वाले दिन ईरान के लिए बेहद भारी साबित हो सकते हैं.

अमेरिका-इजरायल के हमले जारी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं. लेबनान, इराक और ईरान में हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में हुए हमलों में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है. तेहरान के पास परदिस इलाके में मलबे से छह शव बरामद किए गए, जबकि शाह्रियार में एक रिहायशी इलाके पर हुए हमले में नौ लोगों की जान चली गई. वहीं, इराक के अल-काइम क्षेत्र में भी कई एयरस्ट्राइक किए गए, जिनका निशाना पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स का ठिकाना था.

लेबनान में भी इजरायली हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत की खबर है. इन लगातार हमलों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है. इसी बीच पाकिस्तान ने दावा किया है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, जो अब ‘संवेदनशील और अहम चरण’ में पहुंच चुकी है.

कुल मिलाकर, हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. एक ओर ईरान बड़े पैमाने पर जनता को युद्ध के लिए तैयार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की चेतावनियां इस टकराव को और खतरनाक दिशा में ले जा रही हैं. अगर समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है.

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