रात का वक्त, शादी से वापसी, तभी DSP पर तड़तड़ाईं गोलियां…बिजनौर के तंजील अहमद हत्याकांड का आरोपी बरी – NIA DSP Tanzil Ahmed Murder Story Allahabad High Court Acquits Rayyan Death Penalty lclam


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2016 के चर्चित तंजील अहमद हत्याकांड में आरोपी रैयान को राहत देते हुए निचली अदालत का फैसला पलट दिया है. जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने रैयान की फांसी की सजा रद्द कर उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया. 2 अप्रैल 2016 को बिजनौर के श्योहारा में एनआईए अधिकारी और उनकी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. ट्रायल कोर्ट ने 2022 में रैयान और मुनीर को दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका और गवाहों का आचरण भी संदिग्ध रहा.

निचली अदालत की गलती पर टिप्पणी

जस्टिस सिद्धार्थ ने अपने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपील करने वाले को फांसी की सजा देने में गंभीर चूक की है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि निचली अदालत ने साक्ष्यों को समझने में गलती की, जिसे इस तथ्य से समझा जा सकता है कि वह हमारे सिस्टम में भय की सबसे निचली पायदान पर है. अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि रैयान 7 अप्रैल 2016 से लगातार जेल में बंद है.

शादी से लौटते वक्त हुआ था हमला

एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना श्योहारा (बिजनौर) में एक निकाह समारोह में शामिल होने गए थे. रात करीब एक बजे जब वे कार से लौट रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी. तंजील की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी ने 10 दिन बाद दम तोड़ा था. तंजील अहमद उस समय आतंकवाद से जुड़े कई हाई प्रोफाइल और संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे थे.

साक्ष्यों के अभाव में मिली रिहाई

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की राय अलग थी, जिसके बाद प्रकरण चीफ जस्टिस के पास गया और फिर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने यह अंतिम फैसला सुनाया. कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने महीनों घटना स्थल पर डेरा डाला और कई लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन कोई विश्वसनीय सुराग नहीं मिला. मुख्य आरोपी मुनीर की मौत पहले ही हो चुकी है। अंततः साक्ष्यों के अभाव में रैयान को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया.

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