8वीं पास ड्राइवर बना ‘डॉक्टर’, नोटों में खेलता अफजल, तीन वीडियो ने खोली किडनी रैकेट की पोल – kanpur kidney racket videos afzal cash shivam fake doctor expose LCLAR


कानपुर में सामने आए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच में अब बड़ा खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों के हाथ तीन ऐसे वीडियो लगे हैं, जिन्होंने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं. इन वीडियो में रैकेट से जुड़े मुख्य किरदारों की भूमिका साफ नजर आ रही है. पुलिस इन वीडियो को अहम साक्ष्य मानकर जांच को आगे बढ़ा रही है.

पहले वीडियो में मेरठ से जुड़े आरोपी अफजल का एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया है. इस वीडियो में अफजल नोटों की गड्डियों के बीच लेटा हुआ दिखाई देता है. बिस्तर पर बड़ी मात्रा में नकदी इस तरह बिछी है, जैसे उसे जानबूझकर दिखाया जा रहा हो. वीडियो में वह नोटों से खुद को हवा करता नजर आता है. शुरुआती जांच में यह रकम लाखों में बताई जा रही है, जिसे अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ी कमाई माना जा रहा है.

तीन वीडियो से खुला किडनी रैकेट का राज

जांच में यह भी सामने आया है कि अफजल इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता था. वह मरीजों और डोनरों के बीच संपर्क स्थापित करता था और डील फाइनल कराने का काम करता था. सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के वीडियो नेटवर्क के अंदर अपनी पकड़ और प्रभाव दिखाने के लिए बनाए जाते थे. इससे यह भी संकेत मिलता है कि इस रैकेट में बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन होता था, जो सिस्टम से बाहर रहता था.

दूसरे वीडियो में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इसमें शिवम अग्रवाल नाम का एक एंबुलेंस ड्राइवर खुद को डॉक्टर की तरह पेश करता नजर आता है. बताया जा रहा है कि वह सिर्फ 8वीं पास है. वीडियो में एक विदेशी महिला मरीज दर्द और भावुक स्थिति में दिखाई देती है. इसी दौरान शिवम गले में स्टेथोस्कोप डालकर उसका चेकअप करता है और डॉक्टरों की तरह बात करता है.

नोटों के बीच दिखा अफजल, अवैध कमाई के संकेत

वीडियो में वह महिला को इंजेक्शन देने और इलाज करने की बात करता दिखाई देता है. जांच में सामने आया है कि यह महिला अफ्रीका से आई थी और उसका किडनी ट्रांसप्लांट इसी नेटवर्क के जरिए किया गया था. बाद में उसकी हालत बिगड़ गई, लेकिन प्रशिक्षित डॉक्टर की जगह एक गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति उसका इलाज करता दिखा. यह बेहद गंभीर लापरवाही मानी जा रही है.

सूत्रों के अनुसार शिवम का काम शुरुआत में केवल मरीजों को लाना और ले जाना था, लेकिन धीरे-धीरे उसने अस्पताल के अंदर तक अपनी पहुंच बना ली. वह ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचकर मरीजों की स्थिति पर नजर रखता था और कई बार खुद ही जांच करने लगता था.

तीसरा वीडियो इस पूरे रैकेट के एक और पहलू को उजागर करता है. इसमें एक मरीज अस्पताल के बाहर खड़ा होकर अपनी आपबीती बताता नजर आता है. पीड़ित का कहना है कि उसने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए करीब 43 लाख रुपये दिए थे. उसे बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन पैसे लेने के बाद न तो समय पर ऑपरेशन किया गया और न ही उसे सही इलाज मिला.

ड्राइवर बना ‘डॉक्टर’, मरीज की जान से खिलवाड़

पीड़ित के अनुसार लगातार टालमटोल के कारण उसकी हालत बिगड़ती गई और वह आर्थिक रूप से भी टूट गया. वीडियो में वह मानसिक तनाव में नजर आता है और यहां तक कहता है कि उसने आत्महत्या करने तक का विचार किया. यह मामला दिखाता है कि यह रैकेट सिर्फ अवैध ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं था, बल्कि मरीजों से ठगी का भी एक बड़ा खेल चल रहा था.

जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क की पहुंच अस्पताल के अंदर तक थी. बिचौलिये सीधे मरीजों से संपर्क करते थे और पूरे प्रोसेस को नियंत्रित करते थे. विदेशी मरीजों के ट्रांसप्लांट के लिए करोड़ों रुपये तक की डील होने की बात भी सामने आई है.

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह रैकेट केवल एक शहर तक सीमित नहीं था. इसके तार कई राज्यों और विदेशों तक फैले हुए थे. नेपाल से डोनर लाने और विदेशी मरीजों को भारत लाकर ट्रांसप्लांट कराने की जानकारी भी सामने आई है.

43 लाख की ठगी का आरोप, मरीज ने बताई आपबीती

मामले में कई आरोपी, जिनमें कुछ डॉक्टर भी शामिल हैं, फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस टीमें दिल्ली, नोएडा और मेरठ समेत कई शहरों में छापेमारी कर रही हैं. साथ ही वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध अस्पतालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

इस मामले के सामने आने के बाद अन्य पीड़ित भी सामने आने लगे हैं. कई लोगों ने आरोप लगाया है कि उनसे पैसे तो लिए गए, लेकिन ट्रांसप्लांट नहीं किया गया. पुलिस का कहना है कि सामने आए वीडियो और डिजिटल साक्ष्य इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच तेज

फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं. अफजल और शिवम अग्रवाल जैसे किरदारों की भूमिका सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि यह एक संगठित और बहुस्तरीय नेटवर्क था, जिसमें गैर-प्रशिक्षित लोग भी गंभीर चिकित्सा कार्यों में शामिल थे. आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है.

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कानपुर किडनी कांड



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