रूस-चीन से चिढ़े खाड़ी देश, होर्मुज खोलने का प्लान हुआ फेल तो लगाई कड़ी फटकार – united nations security council hormuz strait veto russia china bahrain saudi reaction wdrk


होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को खोलने पर वोटिंग हुई है. होर्मुज खोलने को लेकर बहरीन की तरफ से लाए प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो कर दिया जिससे प्रस्ताव पास नहीं हो सका है. प्रस्ताव के विफल होने पर बहरीन चीन और रूस पर बिफर पड़ा है.

उसने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है. बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन, यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और जॉर्डन का बयान पढ़ा जिसमें इन सभी देशों ने प्रस्ताव के विफल होने पर निराशा जताई है.

अल जयानी ने कहा कि ‘इन देशों ने इस बात पर खेद जताया है कि आज आपके सामने पेश किया गया प्रस्ताव पारित नहीं हो सका. परिषद एक अवैध गतिविधि के मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही. होर्मुज खोलने के लिए बिना किसी देरी के बड़ी कार्रवाई जरूरी थी.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद थी कि यह मसौदा प्रस्ताव एक स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा. इससे होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. होर्मुज एक राष्ट्रीय जलमार्ग है और जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कोई भी देश बाधित करने का अधिकार नहीं रखता.’

चीन-रूस ने किया प्रस्ताव का विरोध, पाकिस्तान रहा दूर

चीन के शुरुआती विरोध के बाद बहरीन की तरफ से लाया गया होर्मुज खोलने का प्रस्ताव पहले ही कमजोर हो गया था. रूस ने भी इसका विरोध किया.  वहीं, पाकिस्तान और कोलंबिया ने वोटिंग से परहेज किया. प्रस्ताव को 11 देशों का समर्थन मिला.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पहले जो प्रस्ताव का ड्राफ्ट था उसमें होर्मुज खोलने के लिए बल प्रयोग की इजाजत का जिक्र था. लेकिन बाद में जो संशोधित प्रस्ताव पेश हुआ उसमें से बल प्रयोग की इजाजत को हटा दिया गया था.

प्रस्ताव में कहा गया कि होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल रास्तों का इस्तेमाल करने वाले देशों को हालात देखते हुए रक्षात्मक सहयोग के लिए तैयार रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ताकि वहां जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित की जा सके.

इसमें कहा गया कि ऐसे सहयोग में व्यापारी और कमर्शियल जहाजों को एस्कॉर्ट देना भी शामिल हो सकता है.

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