बिहार में शासन और सियासत की लिहाज से अगला एक हफ्ता बेहद खास होने वाला है. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के साथ ही यह तय हो गया है कि अब बिहार को नया मुख्यमंत्री फेस मिलेगा. सियासी गलियारे में चर्चा और एनडीए के अंदर गठबंधन वाली राजनीति के साथ यह भी तय है कि पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा.

हालांकि, बीजेपी नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के तौर पर किस चेहरे पर दांव लगाएगी, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है. डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को गठबंधन और सामाजिक समीकरण के लिहाज से सबसे फेवरेट माना जा रहा है. नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेंगे. उसके बाद उनका मुख्यमंत्री से इस्तीफा भी तय है.

बिहार में पॉलिटिकल सुपर वीक

बिहार के लिए 8 अप्रैल से 14 अप्रैल तक का हफ्ता बेहद खास रहेगा. सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली जाने से पहले पटना में अपनी कैबिनेट की अहम बैठक 8 अप्रैल को कर सकते हैं. इस कैबिनेट मीटिंग की आधिकारिक सूचना 7 अप्रैल की शाम तक जारी नहीं हुई थी, लेकिन सचिवालय विभाग ने मीटिंग की सारी तैयारियां कर रखी हैं.

केवल इंतजार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से हरी झंडी मिलने का है. इस कैबिनेट मीटिंग को नीतीश कुमार की सरकार की आखिरी मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है. नीतीश 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेंगे. 11 अप्रैल को एनडीए के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार के पटना वापस लौटने का शेड्यूल है.

सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू के सभी विधायकों को 12 अप्रैल से पटना में मौजूद रहने को कहा गया है. पार्टी के अंदरखाने इस बात की चर्चा है कि राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेने के बाद नीतीश पटना लौटते ही विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं. इसमें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के अपने फैसले के बारे में अधिकारिक तौर पर जानकारी देंगे.

बिहार में नीतीश युग का अंत

इसके बाद नीतीश कुमार राजभवन का रुख करेंगे और राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे. उनके इस्तीफे के निर्णय के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार का इस्तीफा बिहार की सियासत में नीतीश युग के अंत के तौर पर देखा जाएगा. 2005 से नीतीश कुमार बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे.

कभी उन्होंने गठबंधन बदला तो कभी खुद अपने हाथों से जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठवाया, लेकिन हकीकत यही रही कि नीतीश कुमार का राजनीतिक स्वर्णिम युग बिहार की सियासत में देखने को मिला. नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद भी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे. उनके बेटे निशांत की पॉलिटिकल एंट्री भी हो चुकी है.

संभव है कि अगली एनडीए सरकार में निशांत की अहम भूमिका देखने को मिले. लेकिन तमाम फैसलों के बावजूद बिहार की सियासत में इसे नीतीश युग का अवसान माना जाएगा. वो खुद कह चुके हैं कि राज्यसभा जाने के बावजूद बिहार में सक्रिय रहेंगे, लेकिन सच यह है कि दो दशक से ज्यादा वक्त तक शासन के केंद्र में रहने के बाद नेपथ्य में होंगे.

नीतीश नीति पर नई सरकार

नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी अपनी मर्जी से छोड़ रहे हों, लेकिन उनकी पार्टी जेडीयू से लेकर सहयोगी दल बीजेपी यह बताने में पीछे नहीं रह रही कि बिहार की अगली सरकार भी नीतीश कुमार की नीतियों पर ही चलेगी. सरकार के अंदर इसकी तैयारी चल रही है कि आखिरी कैबिनेट मीटिंग नीतीश नीति पर चलने के प्रस्ताव पर मुहर लगे.

एनडीए का पूरा कुनबा पहले ही कह चुका है कि नीतीश कुमार ने जिस सात निश्चय तीन को 2030 तक के लिए तय किया है, उसे उनके मुख्यमंत्री नहीं रहने के बावजूद आगे बढ़ाया जाएगा. जेडीयू अब नीतीश से निशांत युग की तरफ बढ़ रहा है. बिहार में बीजेपी मुख्यमंत्री के लिए बड़ी चुनौती नीतीश कुमार की तरफ से किए गए काम से आगे निकलने की होगी.

मतलब बिहार के लिए आने वाला हफ्ता ना केवल पॉलिटिकल क्लाइमेक्स लेकर आएगा, बल्कि राज्य का भविष्य भी इन तमाम राजनीतिक फैसलों से तय होगा.

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