‘कंबल-तकिया लेकर यहीं सो जाऊं’, PSL की कंगारू खि‍लाड़ी एश्टन टर्नर ने उड़ाई ख‍िल्ली, बयान VIRAL – ashton turner psl 2026 schedule controversy viral comment tspok

ByCrank10

April 8, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) 2026 एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह क्रिकेट नहीं बल्कि शेड्यूलिंग विवाद है. मुल्तान सुल्तांस के कप्तान एश्टन टर्नर ने लीग के शेड्यूल पर खुलकर सवाल उठाए हैं और आयोजकों की प्लानिंग पर नाराजगी जताई है.

सोमवार (6 अप्रैल) को मैच जीतने के बाद पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में टर्नर ने थकाऊ शेड्यूल पर तंज कसते हुए कहा कि शायद उन्हें मैदान पर ही कंबल और तकिया लेकर सोना पड़े. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

दरअसल, मुल्तान सुल्तांस अब तक इस सीजन में 5 मैच खेल चुकी है, जबकि बाकी टीमों का हाल अलग है. तीन टीमों ने 4-4 मैच खेले हैं और तीन टीमों ने सिर्फ 3 मुकाबले खेले हैं. वहीं, पेशावर जाल्मी ने अभी तक केवल 2 मैच ही खेले हैं. ऐसे में शेड्यूल की असमानता पर सवाल उठना लाजिमी है.

स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण तब हो गई जब मुल्तान को लगातार दो दिनों में मैच खेलने पड़े. 5 अप्रैल को क्वेटा ग्लेड‍िएटर्स के खिलाफ मुकाबले में सुल्तांस ने 6 विकेट से जीत दर्ज की. इसके तुरंत बाद अगले ही दिन उन्हें फिर मैदान पर उतरना पड़ा.

इस व्यस्त शेड्यूल को लेकर टर्नर ने कहा- शायद मुझे यहीं कहीं कंबल और तकिया ढूंढकर सोना पड़ेगा, क्योंकि मैचों के बीच बहुत कम समय मिल रहा है.

हालांकि, इस आलोचना के बीच टर्नर ने अपनी टीम के प्रदर्शन की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि टीम ने अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को तेजी से ढाला और तीनों विभागों बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग में शानदार प्रदर्शन किया है.

टर्नर ने मैच के दौरान अपनी रणनीति को लेकर भी खुलासा किया. उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह खुद पहला ओवर डालने वाले थे, लेकिन विपक्षी टीम के ओपनिंग कॉम्बिनेशन को देखते हुए उन्होंने फैसला बदल दिया.

अगर टर्नर के व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो वह इस सीजन में शानदार फॉर्म में हैं. उन्होंने 5 पारियों में 129 रन बनाए हैं और केवल एक बार आउट हुए हैं. गेंदबाजी में भी उन्होंने 2 विकेट हासिल किए हैं.

मुल्तान सुल्तांस ने अब तक 5 में से 4 मुकाबले जीतकर अपनी मजबूत स्थिति बना ली है, लेकिन कप्तान का यह बयान साफ दिखाता है कि टीम के प्रदर्शन के बावजूद शेड्यूल को लेकर असंतोष बना हुआ है.

कौन हैं एश्टन टर्नर
33 साल के टर्नर की बात की जाए तो वो ऑस्ट्रेल‍िया के लिए 9 वनडे और 19 टी20 इंटरनेशनल खेल चुके हैं. जहां उनके नाम क्रमश: 192 और 110 रन हैं; वहीं वो दोनों फॉर्मेट में 2 और 4 विकेट ले चुके हैं. टर्नर का अनुभव टी20 में बहुत जबरदस्त है, वह कुल 257 टी20 में 4232 रन और 40 विकेट ले चुके हैं.

टर्नर का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, लेकिन हर बार उन्होंने अपने प्रदर्शन से खुद को साबित किया है. टर्नर ने 2013 में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया, जब वह इंग्लैंड में क्लब क्रिकेट खेल रहे थे. इसी दौरान उन्हें ऑस्ट्रेलिया की टीम में ससेक्स के खिलाफ एक टूर मैच में मौका मिला. यह उनके करियर की पहली बड़ी एंट्री थी, जहां उन्होंने एलीट लेवल क्रिकेट का अनुभव हासिल किया.

उनका असली ब्रेकआउट सीजन 2016-17 में आया था. इस दौरान उन्होंने तस्मानिया के खिलाफ अपना पहला फर्स्ट-क्लास शतक लगाया और सिर्फ दो मैच बाद क्वींसलैंड के खिलाफ एक और सेंचुरी ठोक दी. इसी शानदार प्रदर्शन का इनाम उन्हें फरवरी 2017 में ऑस्ट्रेलिया नेशनल क्रिकेट टीम की T20I टीम में जगह के रूप में मिला, जहां उन्होंने श्रीलंका नेशनल क्रिकेट टीम के खिलाफ डेब्यू किया.

टर्नर ने इंटरनेशनल स्टेज पर असली पहचान 2019 में बनाई, जब उन्होंने भारतीय टीम के खिलाफ मोहाली में 359 रन के बड़े टारगेट का पीछा करते हुए सिर्फ 43 बॉल में नाबाद 84 रन ठोक दिए. यह पारी उनकी सबसे यादगार पारियों में से एक मानी जाती है.

हालांकि, इस शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद टर्नर को लगातार मौके नहीं मिले. यूएई दौरे पर उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला और वह 2019 वर्ल्ड कप स्क्वॉड से भी बाहर रहे. इसके पीछे उनकी सीधी कंधे की गंभीर चोट भी एक बड़ी वजह रही, जिसने उनकी फील्डिंग और बॉलिंग पर असर डाला. दिलचस्प बात यह है कि अपने शुरुआती करियर में टर्नर एक ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर के रूप में खेले थे, लेकिन 2017 के बाद उन्होंने काफी कम बॉलिंग की.

इसके बाद टर्नर ने घरेलू क्रिकेट में जोरदार वापसी की. 2021-22 बिग बैश लीग में उन्होंने 350 से ज्यादा रन बनाए, वह भी 154 के शानदार स्ट्राइक रेट से. फाइनल में 54 रन की अहम पारी खेलकर उन्होंने पर्थ स्कॉर्चर्स को अपना चौथा खिताब जिताने में बड़ी भूमिका निभाई.

टर्नर का करियर इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा के साथ धैर्य और निरंतर मेहनत हो तो खिलाड़ी हर मुश्किल से बाहर निकल सकता है.

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