स्मार्टफोन इंडस्ट्री में आजकल ढेरों स्मार्टफोन ऐसे लॉन्च हुए हैं, जिनके अंदर मेगा बैटरी का यूज किया है. यानी फोन में 7000mAh से लेकर 9000mAh बैटरी पैक तक के कई फोन मिल जाएंगे. मंगलवार को वनप्लस ने भी 9000mAh की बैटरी वाला फोन लॉन्च किया है.
बड़ा बैटरी पैक देने से स्मार्टफोन को सिंगल चार्ज में ज्यादा चलाया जा सकेगा. वनप्लस का दावा है कि 9000mAh बैटरी वाला वनप्लस नॉर्ड 6 एक बार फुल चार्जिंग के बाद ढाई दिन तक का बैटरी बैकअप देने की काबिलियत रखता है.
आज के समय में लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ चुका है. ऑफिस के काम से लेकर इंडियन प्रीमियर लीक (IPL 2026) के मैच देखने तक में मोबाइल का यूज होता है. ऐसे में ज्यादा बैटरी बैकअप से यूजर्स को फायदा मिलता है. यूजर्स को बार-बार चार्जिंग की जरूरत नहीं होती है.
मेगा बैटरी पैक होने के नुकसान भी
- स्मार्टफोन में मेगा बैटरी पैक देने के कई नुकसान भी हैं. इसकी वजह से मोबाइल की थिकनेस बढ़ जाती है और फोन ज्यादा बल्की नजर नजर आता है.
- मेगा बैटरी पैक की वजह से स्मार्टफोन में चार्जिंग टाइम में इजाफा हो जाता है. ऐसे में यूजर्स को मोबाइल बैटरी को फुल चार्ज करने में ज्यादा समय लगेगा.
- स्मार्टफोन में ज्यादा बड़ी बैटरी होने की वजह से उसमें ओवर हीटिंग से संबंधित समस्या सामने आने लगती है. मोबाइल में ओवर हीटिंग की वजह से मोबाइल की परफोर्मेंस प्रभावित होती है और वह कई बार हैंग भी हो सकता है.
- मेगा बैटरी होने की वजह से स्मार्टफोन में ब्लास्ट होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर बैटरी पर ज्यादा प्रेशर बनता है तो बैटरी में आग लग सकती है.
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ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियां क्यों नहीं करती
सैमसंग और ऐपल के फ्लैगशिप हैंडसेट भारत समेत दुनियाभर में पॉपुलर हैं. इसके बावजूद ये कंपनियां अपने हैंडसेट में मेगा बैटरी जैसे 7000mAh या 9000mAh बैटरी का यूज नहीं करती हैं. इसके पीछे कई वजह हैं, जैसे स्मार्टफोन थिकनेस, फोन सेफ्टी, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड और एफिसिएंसी मैनेजमेंट.
सैमसंग और ऐपल अपनी फ्लैगशिप सीरीज में भले ही 5000mAh से कम साइज का बैटरी पैक यूज करते हैं, उसके बावजूद उसमें बेहतर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को प्रोवाइड कराते हैं. ऐसे में छोटा बैटरी पैक होने के बावजूद फुल डे बैटरी बैकअप मिलता है.
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