नासिक में एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली युवा महिला कर्मचारियों के साथ यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न का मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस ने अब तक छह आरोपियों को अरेस्ट किया है, जिनमें कंपनी के टीम लीडर और इंजीनियर स्तर के कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं.
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अलग-अलग थानों में कुल नौ केस दर्ज किए गए हैं. मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में आठ और देवलाली पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है. इन मामलों में रेप, छेड़छाड़, धार्मिक भावनाएं आहत करने और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.
शिकायत करने वाली महिलाओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी के भीतर पिछले दो से तीन वर्षों से यह सब चल रहा था. उन्होंने बताया कि आरोपी उन्हें शारीरिक रूप से परेशान करने की कोशिश करते थे, उनके कपड़ों और शरीर पर आपत्तिजनक कमेंट किए जाते थे. मानसिक दबाव बनाया जाता था. कुछ मामलों में धार्मिक कमेंट और जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल करने के भी आरोप लगाए गए हैं.
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पीड़िताओं ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कंपनी के HR डिपार्टमेंट में शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इसके चलते अब HR से जुड़ी एक महिला अधिकारी के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है.

इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है. एक पुरुष कर्मचारी ने भी आरोप लगाया है कि उसका ब्रेनवॉश किया गया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया. शिकायत के अनुसार, उसे विशेष धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने और खान-पान से जुड़ी आदतें बदलने के लिए मजबूर किया गया.
पुलिस ने बताया कि आरोपियों में कुछ के नाम आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तर शामिल हैं. इनमें से एक आरोपी पर रेप का आरोप है, जिसने कथित तौर पर पीड़िता को प्रेम जाल में फंसाकर उसका शोषण किया.

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शिकायत करने वाली महिलाओं की उम्र आमतौर पर 18 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है. पुलिस को शक है कि यह घटनाएं साल 2022 से लगातार हो रही थीं. पीड़िताओं में से कई आर्थिक रूप से कमजोर हैं. नौकरी की जरूरत के कारण कंपनी में काम कर रही थीं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (ACP) के नेतृत्व में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है. इस टीम में करीब 12 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं, जो तकनीकी और सबूतों के आधार पर जांच कर रहे हैं.
पुलिस का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखी जा रही है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस केस के तार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित हैं या इसका दायरा और बड़ा हो सकता है. वहीं, आरोपियों की ओर से पेश वकील का कहना है कि वर्क प्लेस के फ्रेंडली माहौल के कारण हुई गलतफहमी भी हो सकती है. उनका कहना है कि FIR सामने आने के बाद ही स्थिति साफ होगी.
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(रिपोर्ट: प्रवीन बी. ठाकरे)

