दुनिया भर में कौन सा देश कितना जिम्मेदार है? इस सवाल का जवाब देता है ‘Responsible Nations Index’ या जिम्मेदार देशों की रैंकिंग. यह World Intellectual Foundation की पहल है, जिसके तहत यह तय किया गया है कि जिम्मेदारियां निभाने में कौन सा देश किस रैंक पर है. यही जिम्नेदारी का भाव किसी देश को दुनिया भर में भरोसे के काबिल बनाती है. RNI जिम्मेदारी (Responsibility) को किसी देश की सफलता का मुख्य पैमाना मानता है.
दुनिया में ं’जंग और सीजफायर’ इन दो शब्दों की चर्चा
इस पैमाने की बात इसलिए हो रही है, क्योंकि दुनिया में इस वक्त ‘जंग और सीजफायर’ इन दो शब्दों की चर्चा है. इसके इर्द-गिर्द दो और शब्द हैं तबाही व शांति. अमिरेका-इजरायल के साथ ईरान की जंग हुई. अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह तबाह कर डालने की धमकी दी और डेडलाइन फिक्स कर दी. इस डेडलाइन के साथ एक और शब्द आया ‘मध्यस्थता’.
पाकिस्तान करा रहा है जंग में ‘मध्यस्थता’!
मध्यस्थता शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान कर रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इसी पाकिस्तान के भरोसे सीजफायर का राग अलाप रहे हैं. लेकिन असल हकीकत ये है कि जो पाकिस्तान अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने खुद को शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जिम्मेदार देशों की लिस्ट में उसकी खुद की रैंकिंग न सिर्फ बहुत खराब है, बल्कि काफी निचले पायदान पर है. बल्कि खुद अमेरिका भी इस लिस्ट में 50 की रैंक से भी बाहर है.
यानी दुनिया में ‘भरोसेमंद और जिम्मेदार’ देशों की टॉप 20 लिस्ट में अमेरिका और पाकिस्तान दोनों ही नहीं आते हैं. जबकि भारत यहां अव्वल है और भारत को जिम्मेदार देशों की रैंकिंग में 16वीं जगह हासिल हुई है. ये आंकड़ा इसी साल जनवरी 2026 में सामने आया था.

सवालों के घेरे में पाकिस्तान की भूमिका
असल में फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान पर ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम कराने के लिए दबाव डाला. हालांकि, इस प्रयास ने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए एक सुविधाजनक माध्यम के तौर पर.
जहां एक ओर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपना रुख और सख्त किया, वहीं पाकिस्तान तेजी से आगे बढ़कर खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करता नजर आया. लेकिन उसके प्रस्तावों में स्वतंत्र या संतुलित शांति पहल के बजाय अमेरिकी रणनीतिक हितों की झलक ज्यादा दिखाई दी. माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर दबाव डाला कि वह ईरान को लड़ाई में सीजफायर स्वीकार करने के लिए मनाए. इस प्रस्ताव का मुख्य फोकस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना है. जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है.
जिम्मेदार देशों की रैंकिंग में कौन कहां?
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका यह थी कि वह इस समझौते को एक मुस्लिम-बहुल देश की ओर से आए प्रस्ताव के रूप में पेश करे, ताकि तेहरान के लिए इसे स्वीकार करना अपेक्षाकृत आसान हो सके. इस बैक-चैनल कोशिश की कमान काफी हद तक पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हाथ में थी, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ कई बार तत्काल बातचीत की. इन संपर्कों में डोनाल्ड ट्रंपउपराष्ट्रपति जेडी वेंस और राजदूत स्टीव विटकॉफ शामिल थे.
जिम्मेदार देशों की इस रैंकिंग में सिंगापुर अव्वल है और पहले पायदान पर है. फिर क्रम से स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, साइप्रस, स्वीडन और बेल्जियम हैं. भारत इसमें 16वें पायदान पर है. अमेरिका बहुत पीछे 66वें पायदान है और अभी जंग के माहौल में ‘शांतिदूत’ बनने की कोशिश में जुटा पाकिस्तान 90वें नंबर पर है. यानी दुनिया भर में जिम्मेदार और भरोसेमंद देशों की लिस्ट में पाकिस्तान बेहद पीछे है.
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