ना पूरी सर्दी… ना पूरी गर्मी… भारत में कभी बसंत एक ऐसा मौसम हुआ करता था जो इन दोनों के बीच संतुलन बनाता था. अब फरवरी खत्म होते-होते ही गर्मी का एहसास होने लगता है और मार्च तक तापमान तेज़ी से बढ़ने लगता है. लेकिन इस बार अप्रैल में भी मौसम का मिजाज बदला-बदला सा है. IMD के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी मिलने की वजह से भी मौसम में अस्थिरता बनी हुई है. वहीं, अप्रैल में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के एक्टिव होने की वजह से उत्तर भारत में तेज हवाएं, बारिश और आंधी की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं.

वहीं, ऐसे में एक सवाल भी उठता है कि क्या बसंत सच में छोटा हो रहा है? इस सवाल पर भारत के दो प्रमुख मौसम संस्थानों India Meteorological Department (IMD) और SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research) के विशेषज्ञों ने खास वजहें बताई हैं.

IMD का नजरिया: जेट स्ट्रीम में बदलाव
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस बार मौसम में तेजी से बदलाव की एक बड़ी वजह Jet Stream में बदलाव है. जेट स्ट्रीम ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवाओं की धारा होती है, जो ठंड और गर्मी के संतुलन को नियंत्रित करती है.

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जब ये धारा अपनी सामान्य स्थिति से हटती है या कमजोर होती है तो ठंडी हवाओं का असर कम हो जाता है. तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और सर्दी से गर्मी के बीच का ट्रांजिशन बहुत छोटा हो जाता है. यही वजह है कि इस बार सर्दी अचानक खत्म हुई और फरवरी में ही गर्मी जल्दी महसूस होने लगी.

SAFAR का विश्लेषण: El Niño से La Niña की ओर बदलाव
वहीं, SAFAR के विशेषज्ञ इस बदलाव को बड़े वैश्विक पैटर्न से जोड़ते हैं. उनके अनुसार, इस समय दुनिया का मौसम El Niño से La Niña की ओर ट्रांजिशन फेज़ में है. अल-नीनो के दौरान समुद्र का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत में सर्दियां कमजोर होती हैं और गर्मी जल्दी आती है. जबकि La Niña इसके उलट असर डालता है. लेकिन जब इन दोनों अवस्थाओं के बीच बदलाव (transition) होता है, तो मौसम अस्थिर हो जाता है. कभी अचानक ठंड, कभी तेज गर्मी और मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है. यही अस्थिरता बसंत जैसे ‘नाज़ुक मौसम’ को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है.

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विशेषज्ञों के मुताबिक, बसंत एक ‘ट्रांजिशन सीजन’ है, जो पूरी तरह संतुलन पर निर्भर करता है. लेकिन अब सर्दियां जल्दी खत्म हो रही हैं, गर्मी जल्दी शुरू हो रही है और मौसम के बीच का अंतर कम होता जा रहा है. जिसकी वजह से बसंत का समय छोटा और कम महसूस होने लगा है.

क्या यह नया नॉर्मल है?
मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि यह सिर्फ एक साल का बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है. बार-बार बदलते वैश्विक पैटर्न, बढ़ता तापमान और अस्थिर मौसम अब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भविष्य में बसंत और भी छोटा हो सकता है.

एक तरफ जेट स्ट्रीम का बदलता रुख और दूसरी तरफ El Niño और La Niña के बीच का ट्रांजिशन दोनों ही मिलकर भारत के मौसम के संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं. इसी बदलाव के बीच वो मौसम, जिसे कभी ‘ऋतुराज’ कहा जाता था वो धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है.

(Manisha Ladda की रिपोर्ट)

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