महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बारामती उपचुनाव से पार्टी के उम्मीदवार आकाश मोरे को हटाने का ऐलान किया. यह फैसला वरिष्ठ नेता अजित पवार के हाल ही में प्लेन क्रैश में हुए दुखद निधन के सम्मान में लिया गया बताया गया है. शुरुआत में सपकाल ने चुनाव आयोग पर बीजेपी की बी-टीम होने का आरोप लगाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने अपना रुख बदल लिया.

इसकी बड़ी वजह एनसीपी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तरफ से आई अपील रही. एनसीपी की तरफ से सुनेत्रा पवार, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे जैसे बड़े नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस से सहयोग मांगा था, ताकि इस दुखद समय में राज्य की राजनीतिक परंपरा का सम्मान किया जा सके.

इस फैसले के पीछे कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं. सुनेत्रा पवार ने खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की. वहीं, रोहित पवार ने कांग्रेस नेतृत्व से मिलकर पार्थ पवार के उस पुराने और अपरिपक्व बयान के लिए माफी मांगी, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के पतन की बात कही थी. इस माफीनामे ने कांग्रेस को एक बड़ा मौका दे दिया. अब कांग्रेस इस रेस से एक ‘हारे हुए दल’ के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘बड़े भाई’ और महाराष्ट्र की गौरवशाली राजनीतिक संस्कृति के रक्षक के तौर पर बाहर निकली है.

मैदान छोड़कर भी कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक फायदा हासिल किया है. पार्टी ने खुद को राजनीतिक सद्भाव का रक्षक साबित कर दिया और विरोधी खेमे से सार्वजनिक रूप से माफी भी मंगवा ली. सुप्रिया सुले ने भी इस बात पर जोर दिया कि उनके परिवार और कांग्रेस का रिश्ता दशकों पुराने भरोसे पर टिका है, जो सिर्फ विचारधारा तक सीमित नहीं है.

दूसरी ओर, जय पवार ने कांग्रेस का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास किया है और निर्विरोध चुनाव ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी. हालांकि, अभी भी 23 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं, जिन्हें मनाने की कोशिश एनसीपी कर रही है ताकि चुनाव पूरी तरह निर्विरोध हो सके.

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