राजस्थान के नागौर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने एक इलेक्ट्रिक कार (EV) का ही प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) चालान काट दिया. इस कार्रवाई के बाद अब पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं.
जानकारी के अनुसार, जोधपुर निवासी पुनाराम ने करीब तीन महीने पहले नई इलेक्ट्रिक कार खरीदी थी. उनका उद्देश्य था कि वाहन से न केवल खर्च कम होगा, बल्कि प्रदूषण से भी बचाव होगा. लेकिन 6 अप्रैल को जब उनका वाहन नागौर में था, तभी यह विवाद खड़ा हो गया.
बताया जा रहा है कि उस समय कार पुनाराम के बड़े भाई अशोक पंवार चला रहे थे. इसी दौरान RTO रोड पर पुलिसकर्मी ने वाहन को रोककर चालान काट दिया. पुनाराम को जब मोबाइल पर चालान का मैसेज मिला तो उन्होंने तुरंत अपने भाई को फोन कर जानकारी दी.
मशीन में सर्टिफिकेट नहीं दिखने का दिया हवाला
अशोक पंवार मौके पर मौजूद ASI राजकुमार के पास पहुंचे और चालान का कारण पूछा. उन्होंने बताया कि यह इलेक्ट्रिक वाहन है, जिससे प्रदूषण नहीं होता. इस पर ASI ने जवाब दिया कि उनकी मशीन में वाहन का PUC सर्टिफिकेट “NIL” दिख रहा है, इसलिए चालान किया गया.
1700 रुपए का चालान
पुलिस ने ₹1500 का PUC चालान और ₹200 का टिंटेड ग्लास (काले शीशे) का चालान बनाकर कुल ₹1700 का जुर्माना वसूल लिया.
कार्रवाई पर उठे सवाल
वाहन चालक अशोक पंवार का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के विपरीत है. उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन से धुआं नहीं निकलता, इसलिए PUC सर्टिफिकेट की आवश्यकता ही नहीं होती. वहीं, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन के शीशों पर काली फिल्म नहीं, बल्कि धूप से बचाव के लिए जाली लगाई गई थी.
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
अशोक पंवार ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की बात कही है.
इस मामले ने एक बार फिर तकनीकी समझ और नियमों की जानकारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस पर क्या स्पष्टीकरण देता है.
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