ईरान और अमेरिका के बीच जंग रुकने के बाद एक बड़ी खबर आई है. ईरान ने कहा है कि वो होर्मुज की खाड़ी से अब सिर्फ 15 जहाज रोजाना गुजरने देगा, जबकि पहले हर दिन 140 जहाज गुजरते थे. यह खबर रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS ने एक ईरानी सूत्र के हवाले से दी है.
होर्मुज की खाड़ी एक बहुत संकरा समुद्री रास्ता है. यह सिर्फ 34 किलोमीटर चौड़ा है और ईरान और ओमान के बीच में है. यह रास्ता खाड़ी के देशों को बाकी दुनिया के समुद्र से जोड़ता है.
दुनिया में जो तेल बिकता है उसका करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इसके अलावा फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजें भी यहीं से जाती हैं. अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और बहुत सारी चीजों की कमी हो सकती है.
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी ने क्या कहा?
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी ने बयान जारी किया. इसमें उन्होंने साफ संकेत दिया कि अब ईरान होर्मुज को सिर्फ नियंत्रित नहीं करेगा, बल्कि इसे और ज्यादा मजबूती और सोच-समझकर इस्तेमाल करेगा.
जंग कैसे शुरू हुई और क्या हुआ?
फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए. इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज की खाड़ी से जहाजों का गुजरना बंद कर दिया. इससे दुनिया भर में तेल के दाम अचानक बहुत बढ़ गए और लोगों को डर सताने लगा कि तेल की सप्लाई रुक जाएगी.
सीजफायर यानी जंग रुकी कैसे?
बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच एक सीजफायर समझौता हुआ यानी दोनों ने दो सप्ताह तक लड़ाई रोकने पर सहमति जताई. इस समझौते में यह तय हुआ कि होर्मुज की खाड़ी को फिर से खोला जाएगा. लेकिन ईरान ने साफ कर दिया कि यह रास्ता पूरी तरह पहले जैसा नहीं होगा.
ईरान की नई शर्तें क्या हैं?
ईरान ने कहा है कि अब हर दिन सिर्फ 15 जहाज ही इस रास्ते से गुजर सकते हैं. जबकि पहले 140 जहाज रोज गुजरते थे. हर जहाज को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC से इजाजत लेनी होगी.
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इजाजत के साथ-साथ एक फीस भी देनी होगी. इस दो हफ्ते के सीजफायर के दौरान एक बैरल तेल पर 1 अमेरिकी डॉलर की फीस ली जाएगी. खास बात यह है कि यह फीस क्रिप्टोकरेंसी में ली जाएगी. ईरान ने यह भी साफ कह दिया कि जंग से पहले जैसा कोई नियम नहीं रहेगा.
अमेरिका की तरफ से क्या बात आई?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस बारे में सोच रहा है कि ईरान के साथ मिलकर इस रास्ते से जहाजों पर एक साझा फीस लगाई जाए. यानी दोनों देश मिलकर इस समुद्री रास्ते को कंट्रोल करें. इसके अलावा अमेरिका ने अपने यूरोपीय साथी देशों से भी कहा है कि वो कुछ दिनों के अंदर बताएं कि वो इस रास्ते की सुरक्षा में कैसे मदद करेंगे.
क्या यह समझौता टिकाऊ है?
बुधवार को समझौता होने के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने तेल के जहाजों को रोक दिया. यह उसने इजरायल के लेबनान पर हमले के जवाब में किया।. इससे साफ है कि यह समझौता अभी बहुत नाजुक है और कभी भी टूट सकता है.
इसका असर दुनिया पर क्या पड़ेगा?
अगर यह रास्ता ठीक से नहीं खुला तो दुनिया भर में तेल के दाम बढ़ेंगे. पेट्रोल, डीजल और उससे जुड़ी हर चीज महंगी हो जाएगी. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा क्योंकि हम बहुत सारा तेल इसी इलाके के देशों से मंगाते हैं.
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