क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दुनियाभर में चर्चा है लेकिन क्या आपको पता है कि इसको किसने तैयार किया है. दरअसल, हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ब्रिटिश क्रिप्टोग्राफर एडम बैक ही बिटकॉइन क्रिएटर्स सातोशी नाकामोटो हैं. रिपोर्टस में दोनों के बीच कई सारे कनेक्शन बताए गए और उनकी ही डिडिटल करेंसी का क्रिएटर्स बताया है. हालांकि बैक ने इन सभी दावों को निराधार बताया और कहा कि वे बिटकॉइन के क्रिएटर्स नहीं हैं.

दरअसल, साल 2009 में बिटकॉइन के सामने आने के बाद इसके निर्माता की पहचान टेक दुनिया के लिए एक बड़ी पहेली बना हुआ है.

हालांकि इसके बाद कई संभावित लोगों के नाम सामने आए हैं. लेकिन अभी तक असली पहचान तक नहीं हो पाई है. इस बीच एडम बैक को अक्सर सबसे मजबूत दावेदार माना गया है, लेकिन उन्होंने इन दावों को खारिज कर दिया है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टस में अनुमान लगाया गया है कि एडम बैक ही सातोशी हो सकते हैं. इसके लिए पुराने ईमेल, फोरम चर्चाओं और क्रिप्टोग्राफी रिसर्च का कई महीने तक एनालाइज किया. बैक का शुरुआती काम उन विचारों से काफी मेल खाता है, जिन्होंने बाद में Bitcoin को आकार दिया.

बिटकॉइन के क्रिएटर्स का नाम सातोशी नाकामोटो बताया गया है, जो एक बदला हुआ नाम है. इसके पीछे असली नाम किसी और का है. अब सवाल आता है कि बिटकॉइन के पीछे असली शख्स कौन है. इसको लेकर अब तक कई लोगों के नाम सामने आ चुके हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में किया दावा

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लगभग 18 महीनों की जांच-पड़ताल की और उसके आधार पर नई रिपोर्ट में कहा गया है कि बैक ही सातोशी हैं. हालांकि बैक ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है.

एडम बैक का पोस्ट

एडम बैक ने X (पुराना नाम ट्विटर) पर पोस्ट किए हैं, जिसमें उन्होंने कहा ‘मैं सातोशी नहीं हूं’. हालांकि उन्होंने क्रिप्टोग्राफी औरर डिजिटल कैश रिसर्च में अपनी शुरुआती भागीदारी को स्वीकार किया है. बैक के इनकार के बाद फिर से चर्चा शुरू हो चुकी है कि बिटकॉइन का क्रिएटर्स कौन हैं.

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सातोशी के रूम में इन लोगों के नाम की चर्चा

  • निक स्जाबो: बिट गोल्ड नाम का आइडिया दिया था.
  • हाल फिनेः Bitcoin का पहला ट्रांजैक्शन इन्हीं को मिला था.
  • डोरियन नाकोमोटो: सरनेम मैच होने की वजह मीडिया ने गलत पहचान कर दी.
  • कैरिज राइट : खुद को सातोशी बताते हैं, लेकिन कम्युनिटी मानती नहीं.

बिटकॉइन क्रिएटर्स के असली नाम पर दुनियाभर में चर्चा इसलिए बनी हुई है क्योंकि क्रिएटर्स ने कभी अपनी पहचान रिवील नहीं की है. इसकी वजह से बिटकॉइन कभी भी एक शख्स पर निर्भर नहीं रहा है.

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