अमेरिकी नौसेना का एक अत्याधुनिक MQ-4C ट्राइटन 9 अप्रैल 2026 को ड्रोन फारस की खाड़ी के ऊपर उड़ान भर रहा था. अचानक इसने अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी कोड 7700 रिलीज किया, जो पायलट या कंट्रोल सिस्टम को किसी बड़ी समस्या का संकेत देता है. इसके तुरंत बाद ड्रोन 10 मिनट से भी कम समय में 12 हजार मीटर से ज्यादा की ऊंचाई खोते हुए तेजी से नीचे गिरने लगा.

फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स पर यह 52 हजार फीट से 9500 फीट तक गिरता दिखा. फिर रडार से गायब हो गया. यह घटना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हुई, जहां दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट है. अभी तक अमेरिकी नौसेना ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन ओपन सोर्स ट्रैकिंग डेटा ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है.

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MQ-4C ट्राइटन ड्रोन क्या है? पूरी स्पेसिफिकेशन

MQ-4C ट्राइटन अमेरिकी नौसेना का हाई अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन है, जो नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन कंपनी ने बनाया है. यह RQ-4 ग्लोबल हॉक का समुद्री संस्करण है. मुख्य रूप से समुद्र की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और लंबी दूरी की टोह लेने के काम आता है. इसकी लंबाई 47.6, पंखों का फैलाव 130.9 फीट और ऊंचाई 15.4 फीट  है.

MQ-4C ट्राइटन ड्रोन

इसका अधिकतम टेकऑफ वजन साढ़े 14 हजार किलो से ज्यादा है. इसमें रोल्स-रॉयस AE 3007H टर्बोफैन इंजन लगा है, जो इसे 575 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड देता है. यह 56 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है. एक बार में 24 से 30 घंटे तक हवा में रह सकता है. इसकी रेंज 15200 किलोमीटर है.

ड्रोन में 360 डिग्री मल्टीफंक्शन रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रारेड कैमरा, सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) सेंसर और स्वचालित जहाज ट्रैकिंग सिस्टम लगे हैं. एक ड्रोन की कीमत लगभग २० करोड़ डॉलर (1856 करोड़ रुपये) है. यह बिना पायलट के उड़ता है. ग्राउंड स्टेशन से 5 सदस्यों की टीम इसे कंट्रोल करती है. ट्राइटन मुख्य रूप से समुद्री इलाकों में दुश्मन जहाजों, पनडुब्बियों और मिसाइल गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल होता है.

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ड्रोन (सीरियल नंबर 169804) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास खुफिया मिशन पर था. लगभग तीन घंटे की निगरानी के बाद यह इटली के सिगोनेला नेवल एयर स्टेशन की ओर लौट रहा था. फ्लाइटराडार24 जैसी वेबसाइट्स पर यह Bahrain के उत्तर में दिख रहा था. अचानक इसमें कम्युनिकेशन लिंक लॉस का कोड 7400 आया, फिर जनरल इमरजेंसी का कोड 7700.

MQ-4C ट्राइटन ड्रोन

इसके बाद ड्रोन तेजी से नीचे गिरने लगा. सिर्फ 10 मिनट में 12 हजार मीटर ऊंचाई कम हो गई और फिर ट्रैकिंग सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ड्रोन फारस की खाड़ी के पानी में गिर गया हो सकता है, लेकिन कोई मलबा या आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है.

क्या ईरान ने ड्रोन को गिराया?

अभी यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है – क्या ईरान ने इसे गोली मार दी? ईरान ने कोई दावा नहीं किया है और अमेरिकी सेना ने भी चुप्पी साध रखी है. विशेषज्ञ कई संभावनाएं बता रहे हैं.

  • पहला – टेक्निकल फेलियर या इंजन खराबी.
  • दूसरा – सैटेलाइट कम्युनिकेशन लिंक का ब्रेकडाउन, जिससे ड्रोन कंट्रोल से बाहर हो गया.
  • तीसरा – ईरान की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) या जैमिंग.

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ईरान के पास रूस और चीन की मदद से मजबूत जैमिंग सिस्टम हैं, जो ड्रोन के सिग्नल बाधित कर सकते हैं. 2019 में भी ईरान ने इसी इलाके में अमेरिकी RQ-4A ग्लोबल हॉक ड्रोन को मार गिराया था. उस समय ईरान ने दावा किया था कि ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र में घुसा था, जबकि अमेरिका ने कहा था कि यह अंतरराष्ट्रीय पानी के ऊपर था.

MQ-4C ट्राइटन ड्रोन

इस बार भी इलाका संवेदनशील है, लेकिन कोई मिसाइल लॉन्च या रडार ट्रैक का सबूत नहीं मिला है. अगर ईरान ने जैमिंग की तो ड्रोन अपने आप नीचे गिर सकता था. लेकिन बिना सबूत के शॉट डाउन कहना जल्दबाजी होगी. अमेरिकी नौसेना अब जांच कर रही है और शायद जल्द ही कुछ बयान आए.

पिछले घटनाक्रम और इसका महत्व

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी ड्रोन मध्य पूर्व में गायब हुआ हो. 2019 के बाद भी कई MQ-9 रीपर ड्रोन ईरान समर्थित हमलों में नष्ट हो चुके हैं. ट्राइटन जैसे महंगे ड्रोन का नुकसान अमेरिका के लिए बड़ी बात है. यह ड्रोन न सिर्फ निगरानी करता है, बल्कि दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को भी ट्रैक करता है. अगर यह सचमुच दुर्घटना है तो टेक्निकल समस्या सामने आएगी. लेकिन अगर ईरान का हाथ है तो तनाव और बढ़ेगा.

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