अमेरिका में एक लंबे कानूनी संघर्ष के बाद भारत में जन्मे ग्रीन कार्ड धारक सुबु वेदम को बड़ी राहत मिली है. एक इमिग्रेशन जज ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि वेदम अमेरिका में रह सकते हैं. यह फैसला उस शख्स के लिए बेहद अहम है, जिसने अपनी जिंदगी के 43 साल एक ऐसे अपराध में जेल में बिताए, जो उसने किया ही नहीं था.

सुब्रमण्यम वेदम, जिन्हें सुबु वेदम के नाम से जाना जाता है, 64 वर्ष के हैं. उन्हें एक हत्या के मामले में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा दी गई थी. बाद में यह साबित हुआ कि वह बेगुनाह हैं. इसके बावजूद उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. जेल से रिहा होने के तुरंत बाद उन्हें अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने हिरासत में ले लिया और पुराने ड्रग्स से जुड़े एक मामले को आधार बनाकर उन्हें भारत भेजने की कोशिश शुरू कर दी.

यह मामला पिछले साल तब और चर्चा में आया जब वेदम को हत्या के केस से बरी किया गया. लेकिन रिहाई के 24 घंटे के भीतर ही उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया. इस कदम के खिलाफ उनकी बहन ने कानूनी लड़ाई शुरू की. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के पास 4 मई तक का समय है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करे या नहीं. फिलहाल वेदम अभी भी इमिग्रेशन कस्टडी में हैं.

43 साल बाद बेगुनाही साबित, कोर्ट से मिली राहत

इस पूरे मामले की जड़ 1980 के दशक में है. वर्ष 1980 में उनके दोस्त और पूर्व रूममेट थॉमस किन्सर की हत्या हो गई थी. उस समय वेदम आखिरी व्यक्ति थे, जिन्होंने किन्सर को जीवित देखा था. इसी आधार पर 1982 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बिना जमानत के जेल में रखा गया. 1983 में उन पर फर्स्ट डिग्री मर्डर का आरोप लगाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था. न कोई हत्या का हथियार मिला, न कोई प्रत्यक्षदर्शी था और न ही कोई स्पष्ट मकसद सामने आया. इसके बावजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुना दी गई.

कई दशकों बाद यह साबित हुआ कि वेदम निर्दोष हैं और उनकी सजा गलत थी. 2025 में उनकी सजा आधिकारिक रूप से खत्म कर दी गई और वह जेल से बाहर आए. लेकिन आजादी का यह पल ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया और उन्हें तुरंत इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया.

सरकार ने उन्हें भारत भेजने की कोशिश इसलिए की क्योंकि उनके खिलाफ 1980 के दशक में कुछ छोटे ड्रग्स से जुड़े मामले थे. उस समय वेदम की उम्र करीब 20 साल थी. हालांकि उस समय वह उम्रकैद की सजा काट रहे थे, इसलिए इन मामलों पर लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया. लेकिन जैसे ही वह रिहा हुए, इन पुराने मामलों को फिर से उठाकर उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.

रिहाई के 24 घंटे में ही ICE ने फिर लिया हिरासत में

2026 की शुरुआत में इमिग्रेशन बोर्ड ने उनके मामले को दोबारा खोलने की अनुमति दी. इसके बाद अप्रैल 2026 में जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वेदम को अमेरिका में रहने दिया जाए. जज ने अपने फैसले में वेदम के जीवन में आए बदलावों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछले 44 सालों में वेदम ने खुद को बेहतर बनाया है. जेल में रहते हुए उन्होंने पढ़ाई की और अपने परिवार, खासकर अपनी चार भतीजियों के साथ संबंध बनाए रखे.

वेदम जब केवल 9 महीने के थे, तब अपने माता-पिता और बहन के साथ अमेरिका आए थे. उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनका परिवार अब उनकी बहन और उसके परिवार तक ही सीमित है. फिलहाल सुबु वेदम अमेरिका में रहने की उम्मीद के साथ अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं. 4 मई तक यह तय होगा कि सरकार इस फैसले को चुनौती देती है या नहीं. यह मामला न्याय व्यवस्था और इमिग्रेशन सिस्टम पर कई सवाल खड़े करता है, लेकिन फिलहाल वेदम के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है.

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