Vastu Tips: ये 4 चीजें सही दिशा में होने से घर बनता है स्वर्ग! खूब तरक्की करता है आदमी – Vastu Tips main door kitchen toilet mandir in right direction make your house heaven tvisu


इंसान की तरक्की का घर के वास्तु के गहरा संबंध होता है. घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बेहतर होगा तो व्यक्ति की उन्नति भी होगी. इसके लिए घर का प्रवेश द्वार, मंदिर, रसोई और टॉयलेट का सही दिशा में होना बहुत आवश्यक है. यदि यह चारों चीजें सही दिशा में होंगी तो आपके घर का वास्तु हमेशा ठीक रहेगा. ऐसा घर स्वर्ग के समान होगा. जहां न तो कभी दुख-दरिद्रता कदम रखेगी. और नहीं व्यक्ति के जीवन में बेवजह की परेशानियां आएंगी. ऐसे घरों में लोगों का जीवन हमेशा खुशहाल रहेगा.

प्रवेश द्वार
प्रवेश द्वारा किसी भी दिशा में रखा जा सकता है. हालांकि इसका सही पद पर होना बहुत आवश्यक है. लोगों में भ्रांति है कि दक्षिण मुखी द्वार ठीक नहीं होता है. या उत्तर और पूर्व मुखी द्वार बहुत लाभकारी और धनदायक होता है. वास्तव में सभी दिशाओं के प्रवेश द्वार अच्छे हैं और सभी दिशाओं के खराब भी. ध्यान रहे कि यदि प्रवेश द्वार सही पद पर है तो शुभफलदायक और अशुभ पद पर है तो अशुभ फलदायक होता है. एक दिशा में कुल 8 पद होते हैं, इनमें से 2 पद ऐसे होते हैं, जिन पर आप मुख्य द्वार बना सकते हैं. उदाहरण के लिए उत्तर दिशा में 1 से लेकर 8 पद हैं. इनमें 2 पद ही ऐसे होंगे जिन पर आप मुख्य द्वार बना सकते हैं.

मंदिर
मंदिर का सबसे उपयुक्त स्थान ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से लेकर पूर्व तक है. यहां मंदिर का होना अत्यंत लाभकारी होता है. लेकिन ठीक पश्चिम दिशा में भी मंदिर बहुत लाभकारी होता है, जो आपकी ईच्छाओं की पूर्ति कराने में सहयोगी होता है. ईशान कोण में स्थापित मंदिर में लाल रंग का अधिक प्रयोग करने से बचना चाहिए.

रसोई
कहते हैं कि अग्नि सिर्फ चूल्हे के अंदर सीमित रहे तो ठीक है. बाहर निकले तो जला देती है. यानी आग अग्नि तत्व में ही ठीक रहती है. किसी भी रूप में अग्नि का अन्य तत्वों में जाना हानिकारक होता है. चाहे वह रंग या मैटल के रूप में ही क्यों न हो. अग्नि तत्व के अलावा आग जहां भी जाएगी, उस तत्व से संबंधित गुणधर्मों में कमी लाएगी. इसलिए रसोई का सबसे बेहतर स्थान (साउथ-ईस्ट, साउथ-साउथ-ईस्ट और साउथ) अग्नि कोण है. इसके अलावा पश्चिम दिशा में भी रसोई बनाई जा सकती है. लेकि यहां स्लैब पर पीले रंग के पत्थर का प्रयोग करें.

टॉयलेट
टॉयलेट का संबंध राहु से होता है. इसके लिए पूरे घर में सिर्फ तीन ही स्थान उपयुक्त है. ईस्ट-साउथ-ईस्ट, साउथ-साउथ-वेस्ट, वेस्ट-नार्थ-वेस्ट दिशा में टॉयलेट बनाना ठीक है. इसके अलावा, टॉयलेट जहां भी होगा, आपके जीवन से उस दिशा के गुणधर्मों को डिस्पोज कर देगा. इसलिए अन्य किसी दिशा में टॉयलेट बनवाना आपकी मजबूरी है या पहले से किसी सकारात्मक दिशा में टॉयलेट है तो उसे ठीक करवा लें. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और साउथ वेस्ट दिशा में बने टॉयलेट का कोई उपाय संभव नहीं है. इसलिए इन दो दिशाओं में गलती से भी टॉयलेट न बनवाएं. अन्यथा जीवन में बड़ी परेशानियां आ सकती हैं.

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